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प्रोफेसर तिवारी दंपत्ति को 3-3 वर्ष की सजा व अर्थदण्ड…

पीड़ित बिहार राज्य के पूर्व सचिव को इन्हें देना होगा 25.50 लाख की क्षतिपूर्त

कोरबा छत्तीसगढ़ – दादरखुर्द में जमीन विक्रय के नाम पर बेईमानीपूर्वक आशय से 16,50,000/- रूपये (सोलह लाख पचास हजार रूपये) प्राप्त कर छल कारित किया गया। बेईमानीपूर्वक लाभ प्राप्त करने के लिए सह आरोपी के साथ आपराधिक षडयंत्र कारित किया। मामले में परशुराम नगर, दादर निवासी प्रोफेसर व उनकी पत्नी के विरुद्ध दण्डादेश पारित हुआ है। प्रकरण में शासन की ओर से जिला लोक अभियोजक (DPO) एसके मिश्रा ने पैरवी की।
दिनांक 10.07.2020 को लिखित शिकायत पत्र मानिकपुर पुलिस सहायता केंद्र( थाना- कोतवाली) में प्रार्थी जगदीश मिश्रा द्वारा प्रस्तुत किया गया। वह मित्र मंडल कॉलोनी, साकेत विहार पटना, जिला-पटना (बिहार), हाल मुकाम ए-104, स्वर्ण रेसीडेंसी, सीपत रोड राजकिशोर नगर बिलासपुर (छ.ग.) का निवासी है। उसका छोटा भाई मदन मिश्रा, पिता स्व. रघुनाथ मिश्रा, एसईसीएल दीपका में जनरल मैंनेजर के पद पर वर्ष 2012-14 के बीच कार्यरत था तथा स्वयं वह अंडर सेकेट्ररी बिहार सरकार की नौकरी से सेवानिवृत्त हो गया है। सेवानिवृत्त होने के पश्चात् प्राप्त राशियों के सदुपयोग हेतु उसे एक भूमि क्रय करने की आवश्यकता थी। अरूण त्रिपाठी एसईसीएल में दीपका गेवरा क्षेत्र में ठेकेदारी करते थे, उन्होंने उसके भाई मदन मिश्रा को बताया कि दादरखुर्द निवासी सुरेशचंद तिवारी अपनी भूमि का विक्रय कर रहे हैं। जिस पर वह और उसका छोटा भाई मदन मिश्रा, अरूण त्रिपाठी के साथ सुरेशचंद तिवारी के घर पहुंचे। तब सुरेश तिवारी ने बताया कि उनकी एक भूमि, जो उनकी पत्नी सुधा तिवारी के नाम पर है और ग्राम दादरखुर्द में स्थित है, जिसका खसरा नंबर पूर्व 529/3/क/2, नया खसरा नंबर 905/2 है, में से 12 डिसमिल भूमि को विक्रय करना चाहते हैं, उसके बाद सुरेश तिवारी ने जमीन दिखाई और पसंद आने पर सौदा कर 16 लाख 50 हजार रुपये का लेन-देन कर जमीन रजिस्ट्री करा दी गई। नामान्तरण के दौरान पता चला कि उक्त जमीन तो इनके नाम पर है ही नहीं, व धोखा हुआ है। पीड़ित ने जब अपने रुपए वापस मांगे तो उसके साथ मारपीट करते हुए धमकी भी दी गई। पीड़ित द्वारा षड्यंत्रपूर्वक ठगी करने की शिकायत दर्ज कराई जिस पर सुरेशचंद्र तिवारी व श्रीमती सुधा तिवारी पर धारा 420, 120 बी के तहत जुर्म दर्ज कर प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
विचाराधीन मामले में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सत्यानंद प्रसाद ने दोषसिद्ध पाते हुए दण्डादेश पारित किया। आरोपीगण सुरेश चन्द्र तिवारी एवं श्रीमती सुधा तिवारी को धारा 420 भा.दं.सं. के अंतर्गत 03-03 वर्ष के कठोर कारावास और 10,000-10,000/- रूपये के अर्थदंड से तथा धारा 120बी भा.दं.सं. के अंतर्गत 03-03 वर्ष के कठोर कारावास और 10,000- 10,000/-रूपये के अर्थदंड से दण्डित किया गया है। उपरोक्त दोनों धाराओं के अंतर्गत दंडित कठोर कारावास साथ-साथ चलेंगी। अर्थदंड अदा नहीं किये जाने पर प्रत्येक धारा के अंतर्गत 06-06 मास के कठोर कारावास की सजा पृथक से भुगताई जावे। अर्थदंड अदा करने में व्यतिकम करने पर भुगताई जाने वाली कारावास की सजा प्रत्येक धारा में पृथक-पृथक अर्थात् एक के बाद एक चलेंगी।


3 माह में देना होगा 25 लाख 50 हजार रुपये
न्यायाधीश ने दण्डादेश में लेख किया है कि आरोपीगण के कृत्य के कारण प्रार्थी जगदीश मिश्रा को अत्याधिक हानि उठानी पड़ी है। प्रार्थी के द्वारा 15,00,000/- रूपये जैसे बड़ी राशि वर्ष 2013 में तथा 1,50,000/- रूपये कुल 16,50,000/- रूपये आरोपीगण को दिया गया है। आरोपीगण को सजा होने के पश्चात् भी प्रार्थी को हुई हानि की भरपाई नहीं होती है। अतः धारा 357 दं.प्र.सं. के अंतर्गत यह न्यायालय आरोपीगण को आदेश देती है कि आरोपीगण 16,50,000/- रूपये तथा वर्ष 2016 से उस पर 6 प्रतिशत का साधारण ब्याज सहित कुल 25,50,000/- रूपये निर्णय दिनांक से 03 माह के भीतर अदा करेंगे। आरोपीगण द्वारा उक्त प्रतिकर की राशि का भुगतान नहीं किये जाने पर उसकी वसूली जुर्माने की वसूली की तरह की जायेगी।

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