LETEST
Blog

बारिश में चप्पल पहनकर स्कूल आए बच्चों को प्राचार्य ने नहीं दी एंट्री, तो भड़के अभिभावकों ने लगाया गंभीर आरोप…

1.चप्पल पहनकर स्कूल पहुंचे बच्चों को स्कूल में प्रवेश नहीं मिला.
2.स्कूल प्राचार्य ने अनुशासन का हवाला देकर बच्चों को लौटाया.
3.अभिभावकों ने जताई नाराज़गी.

जशपुर छत्तीसगढ़ // इस समय बारिश का दौर चल रहा है। जिसकी वजह से स्कूली बच्चों को कई तरह के परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार बारिश की वजह से बच्चों को भीगकर स्कूल जाना पड़ता है। इसी बीच बारिश की वजह से बच्चों के जूते गीले हो गए। जिससे बच्चे चप्पल पहनकर स्कूल चले गए, लेकिन यहां प्राचार्य ने बच्चों को प्रवेश नहीं दिया। स्कूल के प्राचार्य द्वारा बच्चों को स्कूल परिसर से लौटा देने के बाद अभिभावकों में नाराज़गी फैल गई है और स्कूल प्रशासन के रवैये पर सवाल उठने लगे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, मामला कुनकुरी विकासखंड के लोयोला हिंदी माध्यम स्कूल का है। अभिभावकों का आरोप है कि लगातार बारिश के कारण बच्चों के जूते गीले हो गए, जिस कारण वे मजबूरी में चप्पल पहनकर स्कूल पहुंचे। लेकिन प्रिंसिपल फादर सुशील ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।

बताया जा रहा है कि कई बच्चों को स्कूल गेट से ही लौटा दिया गया, जिससे उन्हें मानसिक और शैक्षणिक नुकसान झेलना पड़ा है। बच्चों के परिजनों ने इसे अमानवीय व्यवहार बताया है और कहा कि स्कूल प्रबंधन को बच्चों की परिस्थिति को समझना चाहिए था। इस मामले में जब स्कूल के प्राचार्य से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि, “हम बच्चों में अनुशासन बनाए रखने के लिए यह नियम लागू करते हैं। यूनिफॉर्म और उचित पहनावा विद्यालय के अनुशासन का हिस्सा है।”

हालांकि, अभिभावकों का कहना है कि यह निर्णय व्यवहारिक नहीं है और बच्चों को असुविधा और अपमान का सामना करना पड़ा। चूंकि इस घटना के बाद अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन से लिखित में माफ़ी मांगने और दुबारा बच्चों के साथ ऐसा बरताव नहीं करने की मांग की है। वहीं इस मामले में कुनकुरी विकासखंड शिक्षा अधिकारी सी. आर. भगत ने बताया कि अभी जानकारी मिली है जांच की जाएगी।

यह घटना किस स्कूल की है?
यह घटना लोयोला हिंदी माध्यम स्कूल, कुनकुरी विकासखंड की है।


बच्चों को स्कूल में क्यों नहीं आने दिया गया?


बच्चे चप्पल पहनकर स्कूल आए थे, क्योंकि बारिश में उनके जूते गीले हो गए थे। प्राचार्य ने इसे ड्रेस कोड के खिलाफ माना।


प्राचार्य ने क्या सफाई दी है?
प्राचार्य फादर सुशील का कहना है कि यह नियम अनुशासन बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page