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सुशील इंडस्ट्रीज में मिनरल वाटर के नाम पर बिक रहा दूषित पानी,बिना लाइसेंस चल रहे आर ओ प्लांट,खाद्य FOOD विभाग भी मौन…

कोरबा नगर निगम क्षेत्र के दादर वार्ड नंबर 30 परसुराम नगर स्थित सुशील इंडस्ट्रीज के नाम पर अवैध पानी प्लांट संचालन किया जा रहा है। जो घर पर ही संचालित हो रहा है जो नियम के विरुद्ध है।

कोरबा छत्तीसगढ़ / कोरबा नगर निगम वार्ड नंबर 30 के दादर परशुराम नगर में सुशील इंडस्ट्रीज के द्वारा मिनरल वाटर के नाम पर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पानी बेचा जा रहा है। यह दूषित पानी बोतल, डब्बा और पाउच पैक में उपलब्ध कराया जा रहा है।

क्षेत्र के  इस स्थान पर नकली उत्पादों की बिक्री जारी है। जांच में सामने आया है कि यह आरओ प्लांट बिना किसी लाइसेंस के संचालित हो रहा हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से इस अवैध कारोबार पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। इस दूषित पानी के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

क्षेत्र में गर्मी बढ़ते ही बोतल बंद वह ठंडा पाउच के पानी की बिक्री बढ़ जाती है। मांग बढ़ने से इनके ब्रांडों की संख्या भी दिनों दिन बढ़ रही है। ना तो पानी की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है और ना ही मानक का।

नगर निगम क्षेत्र के दादर के इस फैक्ट्री से जहां पानी डिब्बों में भरकर घरों , दुकानों और कार्यालयो में सप्लाई किया जा रहा है। यहां पानी के पाउच भरने का काम भी होता है। जिनकी कीमत 10 से 20 रुपए प्रति डिब्बा तथा 2 रुपए पाउच है।

यह पानी कितने पीने योग्य नहीं है। बोतलों पाउचों में कंपनी का नाम पता रजिस्ट्रेशन नंबर आदि तो लिखा है। लेकिन कंपनियां कही सरकारी अभिलेख में दर्ज ही नहीं है।

ना टंकी की सफाई, ना फिल्टर का पता वाटर प्लांट में स्वच्छता का नामोनिशान नहीं होता। जिन टंकियां में पानी भरा रहता है, वह भी कभी साफ की गई है या नहीं, पानी को फिल्टर किया जाता है कि नहीं, इसे देखने वाला कोई नहीं।

टंकी से पानी निकाल कर सीधा डिब्बों में भरा जाता है। पाउच शहर में 2 रुपए का बेचा जाता है उसमें अक्सर गंदगी निकलती है। इस संबंध में तहसीलदार ने कहा है की शिकायत मिलती है तो जांच कराई जाएगी।

समय की आवाज CG NEWS ने खास पड़ताल की तो पता चला कि फूड अधिकारियों की मिली भगत से कई अवैध पानी फैक्ट्रियां संचालित हो रही है। अवैध फैक्ट्रियां से हर महीने मोटी रकम की फूड अधिकारियों के द्वारा वसूली की जा रही है।

फ़ूड अधिकारी संघर्ष मिश्रा को कई बार फोन लगाने पर भी फोन रिसीव नहीं किए।

फोन ना उठाने की “बीमारी”बनी समस्या, कोरबा में अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल.

शहर में कुछ अधिकारियों द्वारा फोन ना उठाने की आदत अब आमजन के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन गई है। चाहे कोई आपात स्थिति हो या जरूरी जानकारी लेनी हो, कई अधिकारी ना तो फोन रिसीव करते हैं और ना ही समस्याएं गंभीरता से सुनते हैं।

जनता का कहना है कि यह अधिकारी किसके प्रति जवाबदेह है, यह तो परमात्मा ही जाने, लेकिन निश्चित रूप से आमजन के प्रति जवाब देही का भाव इनमें नहीं दिखता। लोग बार-बार कॉल करते हैं, लेकिन उन्हें कोई उत्तर नहीं मिलता, जिससे सरकारी कामकाज में देरी और सुविधा बढ़ जा रही है।

जनता का आक्रोश अब बढ़ने लगा है और मांग की जा रही है कि प्रशासन इस गैर जिम्मेदाराना रवैए पर संज्ञान ले और आवश्यक कदम उठाए, ताकि अधिकारी जनता से संवाद में लापरवाही ना बरते।

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