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पुलकित का अपहरण और प्रखर का बदला, रायपुर जूक बार हिंसा का सच…

रायपुर छत्तीसगढ // तेलीबांधा थाना क्षेत्र के वीआईपी रोड स्थित जूक बार में रविवार रात एक बड़े सट्टा और लेन-देन विवाद के कारण मारपीट और हिंसक घटना हुई। इस मामले में कई लोगों के नाम सामने आए हैं और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। घटना में कई लोग घायल हुए हैं, जबकि आरोपी कुछ लोग फरार बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, घटना की शुरुआत उस समय हुई जब भिलाई और रायपुर के कुछ युवक जूक बार में पार्टी करने पहुंचे।
भिलाई से आए प्रखर चंद्राकर, पुलकित चंद्राकर, मुकुल सोना और प्रेम वर्मा सहित अन्य लोग वहां पहुंचे थे। इसी बीच अज्जू पांडे उर्फ अजय शंकर पांडे भी क्लब में पहुंचे। पुलकित चंद्राकर और अज्जू पांडे के बीच पहले से ही दुश्मनी थी। अज्जू को देखते ही पुलकित, प्रखर, मुकुल और उनके साथियों ने गाली-गलौज करते हुए हमला शुरू कर दिया। हिंसक घटना पहले बार के भीतर हुई, फिर बाहर भी चली। मारपीट के दौरान पिस्टल के बट से हमला करने की चर्चा भी है, हालांकि पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इस घटना में कई लोग घायल हुए हैं और घायल अज्जू पांडे को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

विकास अग्रवाल ने 2 जुलाई की रात किया था पुलकित चंद्राकर का अपहरण
सूत्रों के मुताबिक, यह घटना सट्टे के पैसों को लेकर हुई विवाद का परिणाम है। विकास अग्रवाल और पुलकित चंद्राकर के बीच 28 लाख रुपए की लेन-देन को लेकर पुराना विवाद था। आपको बता दें कि सूत्रों का कहना है कि आज से 2 महीने पहले 2 जुलाई 2025 की रात विकास अग्रवाल ने अपने कुछ गुंडों के साथ मिलकर पुलकित चंद्राकर और उसकी एक महिला मित्र को भिलाई थाना इलाके से अगवा करके रायपुर लेकर आए थे। फिर विकास अग्रवाल ने आमानाका थाना इलाके में पुलकित चंद्राकर को पीटा, फिर विकास अग्रवाल ने डीडी नगर थाना इलाके में गाडी रोककर उससे पैसे देने को कहे मगर पुलकित ने उसे पैसे ख़त्म होने की बात कही तभी विकास अग्रवाल ने उसे पिस्टल के बट्टे से उसके चेहरे पर ताबड़तोड़ वार कर दिया। फिर भी बात नहीं बनी उसके बाद विकास अग्रवाल ने पुरानी बस्ती थाना इलाके के भाठागांव रिंग रोड नंबर 1 में कार रोककर अपने और गुंडों के साथ मिलकर पुलकित को अधमरा कर दिया। इसके बाद विकास अग्रवाल ने तेलीबांधा थाना इलाके के इंडियन ढाबा वाली लाइन के पास फिर पुलकित चंद्राकर के कपडे उतारकर उसके बेल्टों से पीटा।


इस पुरे अपहरणकांड का मास्टर माइंड था विकास अग्रवाल जिसने पैसों के लिए इतने बड़े अपहरण की साजिश को रचा था। आपको बता दें कि विकास अग्रवाल वो शख्स है जो कि रायपुर शहर का सबसे बड़ा सटोरिया है, जिसने हाइपर क्लब में भी गोलियां चलाई थी। इसके खिलाफ तेलीबांधा थाना इलाके में कई अलग-अलग धाराओं में अपराध दर्ज है और कई दिनों से विकास अग्रवाल रायपुर शहर से फरार चल रहा था। इस अपहरणकांड की पूरी घटना के दौरान हिस्ट्रीशीटर प्रखर चंद्राकर जो कि महादेव सट्टा एप के मालिक सौरभ चंद्राकर का भांजा है वो उस वक़्त जेल के सलाखों के पीछे था। दरअसल सूत्रों के हवाले से इस पुरे मारपीट काण्ड का सबसे बड़ा खुलासा जनता से रिश्ता कर रहा है। मगर पुलिस ने भी इस अपहरण काण्ड की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। आपको बता दें कि पुलकित चंद्राकर भी भिलाई और दुर्ग का फरार अपराधी है जिसके खिलाफ भिलाई में भी हत्या के प्रयास मामलें में अपराध दर्ज किए गए है वही केस लगते ही पुलकित चंद्राकर दुर्ग जिले से फरार हो गया था जिसको दुर्ग पुलिस आज तक पकड़ नहीं पाई है। अब देखने वाली बात ये है कि क्या रायपुर पुलिस पुलकित चंद्राकर को हत्या के प्रयास मामलें में गिरफ्तार कर पाती है।

मारपीट की असली वजह बनी पुरानी पैसों की रंजिश
रविवार रात की मारपीट का मुख्य कारण यही पुराना सट्टा विवाद बताया जा रहा है। पुलकित और उसके साथी अजय को सबक सिखाने की योजना बनाकर जूक बार पहुंचे। प्रखर चंद्राकर, जो भिलाई का रहने वाला है और इतिहास में हिस्ट्रीशीटर माना जाता है, ने इस योजना में सक्रिय भूमिका निभाई। प्रखर भिलाई के हिस्ट्रीशीटर अमित जोश से भी जुड़ा हुआ है, जिनका एनकाउंटर पहले हो चुका है। इस घटना में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि प्रखर चंद्राकर, सट्टा किंग सौरभ चंद्राकर का सगा भांजा है। वहीं, विकास अग्रवाल इस मामले में शामिल था। विकास की रंजिश के कारण क्लब में हिंसा बढ़ गई और मारपीट में कई लोग शामिल हो गए।
घटना के समय क्लब और बार में मौजूद लोगों के अनुसार, पुलकित और प्रखर ने अज्जू पर हमला किया। वहीं, कुछ आरोपी फरार भी बताए जा रहे हैं। पुलिस ने फरार आरोपियों में प्रखर चंद्राकर, पुलकित चंद्राकर और मुकुल सोना का नाम लिया है। वहीं, अज्जू पांडे ने जूक क्लब के बाहर की पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया था जिसके बाद पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। सूत्रों के अनुसार, हाइपर क्लब में पहले भी विकास अग्रवाल और रोहित तोमर के बीच विवाद हुआ था। इस दौरान रोहित ने विकास से विवाद के समय गोली चलाई थी। इस मामले को लेकर भी जांच चल रही है। इस घटना ने रायपुर और भिलाई के क्लब व बार संचालकों को पुलिस द्वारा दी गई चेतावनी की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस पहले ही होटल, क्लब और पब संचालकों को लेट नाइट पार्टियों को बंद रखने की चेतावनी दे चुकी है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि यह चेतावनी प्रभावी नहीं साबित हो रही है।


घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। तेलीबांधा पुलिस ने दो युवकों को पकड़कर थाने लाया और बाकी आरोपियों की तलाश में जुट गई। घटना में घायल हुए अज्जू पांडे को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि अन्य घायल लोगों का प्राथमिक इलाज किया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और इस हिंसक घटना में शामिल सभी पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सट्टा और लेन-देन के विवाद ने इस हिंसा को जन्म दिया। विकास अग्रवाल और अजय पांडे के बीच पुलकित चंद्राकर से 28 लाख रुपए लेने को लेकर पुराना विवाद था, जिससे मारपीट की साजिश बनी। पुलकित ने रकम देने से इनकार किया और धमकी भी दी, जिससे यह विवाद हिंसक रूप ले गया। इस घटना में शामिल कुछ आरोपी ऐसे हैं जिनका अपराध रिकॉर्ड पहले से है। प्रखर चंद्राकर भिलाई के हिस्ट्रीशीटर अमित जोस से जुड़ा है और पुलकित चंद्राकर के खिलाफ भी कई मामले दर्ज हैं। इसके अलावा, आरोपी महादेव सट्टा ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर का भांजा है।


पुलिस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले की तह तक जाने के लिए लगातार जांच कर रही है। तेलीबांधा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दबाव या रसूखदार व्यक्ति को अपराधियों को बचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। रायपुर में क्लब और बार संचालकों के लिए पुलिस चेतावनी जारी कर रही है कि वे लेट नाइट पार्टियों और शराब पर नियंत्रण रखें। लेकिन घटना यह दिखाती है कि कानून और व्यवस्था की दृष्टि से यह चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। स्थानीय प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, विकास अग्रवाल और अज्जू पांडे दोस्त रहे हैं, लेकिन सट्टे के पैसों के विवाद ने दोनों के रिश्ते को तनावपूर्ण बना दिया। इससे पहले भी दोनों पक्षों में हिंसक झड़पें हो चुकी हैं। पुलकित और उसके साथियों ने जूक बार में उपस्थित होकर यह हिंसा अंजाम दी। इस घटना ने रायपुर और भिलाई में रात की पार्टियों और क्लब संस्कृति पर भी प्रश्न खड़ा किया है। पुलिस और प्रशासन को इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। भविष्य में ऐसी हिंसक घटनाओं से बचने के लिए क्लब और बार मालिकों को अधिक जिम्मेदाराना व्यवहार करना होगा और कानून का पालन करना होगा।

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