LETEST
CHHATTISGARHKORBA

कोरबा: समाजसेवी व अधिवक्ता दिलीप मिरी के खिलाफ फर्जी मामलों का आरोप, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग की

कोरबा। समाजसेवी एवं अधिवक्ता दिलीप मिरी के विरुद्ध लगातार झूठे, मनगढ़ंत और आधारहीन प्रकरण दर्ज किए जाने के विरोध में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना (गैर राजनीतिक संगठन) ने मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन को एक विस्तृत शिकायत भेजी है। संगठन ने इसे कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

घर में घुसकर गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना द्वारा भेजे गए शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि शत्रुहन सिंह राजपूत और उसके 15–20 साथियों ने दिलीप मिरी के घर में जबरन प्रवेश कर गंदी गालियाँ दीं, परिवार को धमकाया और भय का माहौल बनाया। संगठन ने इस कृत्य को समाजसेवी और अधिवक्ता को मानसिक व सामाजिक रूप से प्रताड़ित करने का सुनियोजित प्रयास बताया है।

पुलिस पर संरक्षण देने का आरोप

संगठन का कहना है कि बार-बार शिकायत के बाद भी पुलिस ने शत्रुहन सिंह राजपूत पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की। इसके विपरीत, समाजसेवियों पर ही प्रकरण थोपे जा रहे हैं, जो स्पष्ट रूप से पुलिस की पक्षपातपूर्ण भूमिका और आरोपी को संरक्षण देने का संकेत है।

तथ्यों की अनदेखी कर दर्ज की गई मनगढ़ंत एफआईआर

शिकायत के अनुसार 14 नवंबर 2025 को थाना कोतवाली में शत्रुहन सिंह राजपूत के कहने पर तथ्यहीन एफआईआर दर्ज कर दी गई, जबकि 07 नवंबर 2025 को कलेक्टर द्वारा मामले की तथ्य-जांच के निर्देश जारी हो चुके थे। स्थानीय पार्षदों द्वारा आरोपी की गतिविधियों की पूर्व शिकायतें भी पुलिस द्वारा अनदेखी की गईं।

स्थापना दिवस के वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी बाधा

छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस, 01 नवंबर 2025 को, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना द्वारा सार्वजनिक भूमि पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। संगठन ने आरोप लगाया है कि शत्रुहन सिंह राजपूत ने अवैध कब्जे की मंशा से कार्यक्रम में बाधा डाली और बाद में बदले की भावना से झूठी एफआईआर कराई।

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना की मांगें

संगठन ने मुख्यमंत्री से निम्न मांगें की हैं—1. दिलीप मिरी के खिलाफ दर्ज सभी झूठे एवं दुर्भावनापूर्ण प्रकरणों को तत्काल निरस्त कर निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

  1. शत्रुहन सिंह राजपूत के खिलाफ घर में घुसकर धमकी देने, गाली-गलौज करने और फर्जी शिकायतें करने पर कठोर कार्रवाई की जाए।
  2. पूरे प्रकरण में संलिप्त एवं पक्षपातपूर्ण भूमिका निभाने वाले पुलिस अधिकारियों को निलंबित/स्थानांतरित कर विभागीय जांच शुरू की जाए।
  3. स्थानीय पार्षदों द्वारा पूर्व में भेजे गए पत्रों व शिकायतों को भी जांच में शामिल किया जाए।
  4. समाजसेवियों, अधिवक्ताओं व जनप्रतिनिधियों को प्रताड़ित करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पुलिस प्रशासन को विशेष निर्देश जारी हों।

शिकायत की प्रतियां पुलिस अधीक्षक कोरबा, थाना प्रभारी कोतवाली तथा चौकी प्रभारी मानिकपुर को भी भेजी गई हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page