भीषण गर्मी में राहत का मरहम: कोरबा के सर्वमंगला चौक में पुलिस की अनूठी पहल, शुरू हुआ ‘पुलिस प्याऊ’…

कोरबा, 22 अप्रैल 2026: चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के इस दौर में जहाँ पारा लगातार बढ़ता जा रहा है, वहीं कोरबा जिले की पुलिस ने मानवीय संवेदनाओं की एक अनूठी मिसाल पेश की है। सर्वमंगला चौक पर आम राहगीरों और बेजुबान जानवरों को राहत पहुँचाने के उद्देश्य से कुसमुंडा पुलिस और सर्वमंगला चौकी की ओर से एक सराहनीय पहल का शुभारंभ किया गया।

राहगीरों के लिए शीतल जल और बेजुबानों के लिए ‘कोटना’
सर्वमंगला चौक पर बढ़ती गर्मी को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा ‘पुलिस प्याऊ’ की शुरुआत की गई है। इस केंद्र पर राहगीरों के लिए शीतल पेयजल की व्यवस्था की गई है ताकि तपती धूप में सफर करने वाले यात्रियों को तुरंत राहत मिल सके।
इतना ही नहीं, पुलिस की इस संवेदनशीलता का दायरा केवल इंसानों तक सीमित नहीं रहा। यहाँ बेजुबान जानवरों की प्यास बुझाने के लिए ‘कोटना’ (पानी का पात्र) की भी विशेष व्यवस्था की गई है, जहाँ से मवेशी और अन्य पशु अपनी प्यास बुझा सकेंगे। पुलिस की इस पहल की स्थानीय निवासियों ने जमकर सराहना की है।

‘एक पेड़ माँ के नाम’
पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
पुलिस प्याऊ के साथ-साथ पुलिस प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण का कार्यक्रम भी आयोजित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पौधों का वितरण किया गया, ताकि आम नागरिक भी अपने आसपास के वातावरण को हरा-भरा रखने में अपना योगदान दे सकें।
‘पुलिस अधिकारियों का संदेश’
इस नेक कार्य का शुभारंभ कुसमुंडा थाना प्रभारी मृत्युंजय पाण्डेय और सर्वमंगला चौकी प्रभारी विभव तिवारी की उपस्थिति में किया गया।
इस अवसर पर थाना प्रभारी मृत्युंजय पाण्डेय ने कहा
“भीषण गर्मी में राहगीरों की प्यास बुझाना और बेजुबान जानवरों का ख्याल रखना हमारा सामाजिक दायित्व है। पुलिस का काम केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है ताकि आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा मिल सके।”
चौकी प्रभारी विभव तिवारी ने भी उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे पौधों को केवल लगाएं नहीं, बल्कि उनका संरक्षण भी करें, ताकि वे बड़े होकर पर्यावरण को संवारने में सहायक बन सकें।
पुलिस की इस मानवीय पहल ने साबित कर दिया है कि खाकी वर्दी के पीछे एक संवेदनशील दिल भी धड़कता है, जो संकट के समय समाज के हर जीव की चिंता करने के लिए तत्पर है।



