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KORBA BREAKING : दीपका उपचुनाव में बड़ा विवाद, हाईकोर्ट पहुंचा मामला! प्रत्याशी को चुनाव लड़ने से रोकने ‘मनमाना नियम’ थोपने का आरोप…

CMO पर पावर के दुरुपयोग के गंभीर आरोप, हाईकोर्ट के फैसले पर टिकीं शोभा तिग्गा की उम्मीदें

बिलासपुर/कोरबा। नगर पालिका परिषद दीपका के वार्ड क्रमांक-15 में हो रहे उपचुनाव ने अब कानूनी और राजनीतिक रंग ले लिया है। चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही प्रत्याशी शोभा तिग्गा ने आरोप लगाया है कि उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने के लिए नगर पालिका प्रशासन ने नियमों से परे जाकर मनमानी की और उनका नामांकन खारिज कर दिया। मामला अब सीधे हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है।

याचिका में राज्य शासन, निर्वाचन आयोग, जिला निर्वाचन अधिकारी, दीपका नगर पालिका के CMO और रिटर्निंग ऑफिसर को पक्षकार बनाया गया है। शोभा तिग्गा ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग कर उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया गया।

नामांकन के समय अचानक मांगा गया NOC, खड़े हुए सवाल

याचिकाकर्ता के अनुसार वर्ष 2021 में नगर पालिका की चौपाटी स्थित दुकान क्रमांक-06 के सभी बकाए का भुगतान कर दिया गया था। इसके बावजूद 18 मई 2026 को नामांकन जमा करने पहुंचने पर CMO कार्यालय ने अचानक दुकान से संबंधित NOC या पंचनामा प्रस्तुत करने की शर्त रख दी।

शोभा तिग्गा का आरोप है कि ऐसा कोई नियम चुनाव लड़ने की पात्रता में नहीं है और न ही उनके खिलाफ किसी प्रकार की बकाया वसूली या कानूनी कार्रवाई लंबित है। इसके बावजूद नामांकन स्वीकार करने से पहले NOC की मांग करना पूरी तरह मनमाना कदम था।

“कानून से ऊपर नहीं हो सकते अधिकारी”

याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 35 के तहत शोभा तिग्गा किसी भी प्रकार की अयोग्यता की श्रेणी में नहीं आतीं। ऐसे में अतिरिक्त दस्तावेज की मांग कर चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

याचिका में 18 मई को जारी विवादित पत्र को निरस्त करने और बिना गैर-कानूनी शर्त लगाए नामांकन स्वीकार करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

“चुनाव से बाहर करने की साजिश?”

शोभा तिग्गा ने अपनी याचिका में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि NOC की शर्त सिर्फ उन्हें चुनावी मैदान से बाहर करने के उद्देश्य से थोपी गई। उनका दावा है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद अधिकारियों ने नामांकन प्रक्रिया को बाधित किया, जो प्रशासनिक शक्ति के मनमाने उपयोग को दर्शाता है।

अब पूरे मामले पर हाईकोर्ट की नजर है और फैसला यह तय करेगा कि वार्ड 15 के उपचुनाव में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जीत होगी या प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल और गहरे होंगे।

CMO पर पहले से भी उठ रहे सवाल

इधर दीपका नगर पालिका के CMO को लेकर क्षेत्र में पहले से कई चर्चाएं और शिकायतें सामने आती रही हैं। स्ट्रीट लाइट, विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और हालिया चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है। लेकिन लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

जनता पूछ रही है – क्या होगा सच का खुलासा?

नगरवासियों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। लोगों की मांग है कि पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।

बड़ा सवाल

क्या दीपका उपचुनाव में नियमों की आड़ में प्रत्याशी को रोका गया? क्या प्रशासनिक शक्तियों का हुआ दुरुपयोग? अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।

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