
कोरबा। वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी संस्था नोवा नेचर के संयुक्त प्रयासों से एक घायल मॉटल्ड वुड आउल (चितकबरा उल्लू) को नई जिंदगी मिली। कई दिनों तक उपचार और देखभाल के बाद इस दुर्लभ रात्रिचर पक्षी को उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
जानकारी के अनुसार, रजगामार क्षेत्र में कौवों के हमले से मॉटल्ड वुड आउल गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसके कारण वह उड़ने में असमर्थ था। स्थानीय निवासी होमेश ने पक्षी को सुरक्षित स्थान पर रखकर इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम और नोवा नेचर संस्था के जितेंद्र सारथी मौके पर पहुंचे तथा घायल पक्षी का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।
वन विभाग के अधिकारियों के निर्देशन में पशु चिकित्सक डॉ. अनिकेत ने कई दिनों तक उल्लू का उपचार किया। इस दौरान उसके घावों की नियमित ड्रेसिंग, उचित आहार और विशेष देखभाल की गई। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद फॉरेस्ट बिट ऑफिसर कमलेश कुम्हार और जितेंद्र सारथी ने उसे उसके प्राकृतिक जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार मॉटल्ड वुड आउल भारतीय वनों का एक महत्वपूर्ण रात्रिचर शिकारी पक्षी है। यह चूहों और अन्य छोटे जीवों की संख्या नियंत्रित कर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए इसे किसानों का प्राकृतिक मित्र भी माना जाता है। भारत में इस प्रजाति को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं कोई घायल या संकटग्रस्त वन्यजीव दिखाई दे तो उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग या संबंधित रेस्क्यू टीम को सूचना दें, ताकि समय पर उसका उपचार और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।



