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वनवासी कल्याण आश्रम ने पद्मश्री विभूतियों का किया सम्मान, जनजातीय सेवा को बताया प्रेरणादायी…

रायपुर | जनजातीय समाज के उत्थान, शिक्षा, स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पद्मश्री सम्मान प्राप्त तीन विभूतियों का शनिवार को रायपुर में वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा सम्मान किया गया। वनवासी विकास समिति के तत्वावधान में रोहिणीपुरम स्थित शबरी कन्या आश्रम परिसर में आयोजित सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में समाजसेवी, शिक्षाविद, कार्यकर्ता और नागरिक शामिल हुए।
सम्मानित होने वालों में बुधरी ताती, डॉ. राम गोडबोले और सुनीता गोडबोले शामिल रहे। तीनों ने वर्षों तक बस्तर के सुदूर वनांचलों में रहकर जनजातीय समाज के स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक विकास के लिए कार्य किया है।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता माधवी जोशी ने कहा कि पद्मश्री सम्मान से सम्मानित इन विभूतियों का जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सेवा कार्य करते हुए इन लोगों ने नक्सलवाद जैसी कठिन परिस्थितियों का भी डटकर सामना किया और कभी अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटे।

वनवासी विकास समिति के अध्यक्ष उमेश कच्छप ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन विभूतियों का सम्मान करना समिति के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना वर्ष 1952 में जशपुर से हुई थी और संस्था अपने 75 वर्ष पूरे करने की ओर अग्रसर है। संस्था आज भी जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के विभिन्न कार्यों में सक्रिय है।

समारोह के दौरान शबरी आश्रम छात्रावास की छात्राओं ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में उत्साह का वातावरण बनाया। कार्यक्रम का संचालन राजीव शर्मा ने किया तथा समापन राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के साथ हुआ।
इस अवसर पर रामनाथ कश्यप, डॉ. अनुराग जैन, डॉ. विजय शांडिल्य, रवि गोयल, आरती दुबे, वैजयंती कच्छप, गिरीश गोपीनाथ, नागेश काले, शशांक शर्मा सहित अनेक प्राध्यापक, समाजसेवी, मीडिया प्रतिनिधि और शहर के नागरिक उपस्थित रहे।

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