
कोरबा (छत्तीसगढ़) // प्रदेश में गरीबों के निवाले पर डाका डालने और सरकारी योजनाओं की धज्जियां उड़ाने का एक बड़ा मामला कोरबा जिले से सामने आया है। ‘भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा’ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में हो रहे बड़े फर्जीवाड़े और चावल की रीसाइक्लिंग का भंडाफोड़ किया है। ज्ञापन में सीधे तौर पर **खाद्य निरीक्षक संतोष कंवर** और राइस मिलर्स-पीडीएस दुकानों की सांठगांठ पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
क्या है पूरा मामला? (गरीबों के हक पर डाका)
भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष **अरशद लारी** द्वारा जनदर्शन (टोकन नं. 2050126002853) के माध्यम से सौंपी गई शिकायत के अनुसार, कोरबा जिले (विशेषकर शहरी क्षेत्रों) में पीडीएस दुकान संचालक (जो कि स्वयं अपात्र हैं) गरीबों को मिलने वाले राशन के चावल की अवैध खरीद-बिक्री कर रहे हैं।
यह चावल बाद में *राइस मिलर्स* को बेचा जाता है, जहाँ से इसे चमकाकर और रीसायकल करके ऊंचे दामों पर खुले बाजार में बेचा जा रहा है या फिर वापस नान (NAN) गोदामों में जमा कराया जा रहा है। यह सीधे तौर पर *’फूड कंट्रोल ऑर्डर’* का उल्लंघन और आपराधिक गठजोड़ है।
खाद्य अधिकारी के ‘कथित रिश्तेदार’ होने का फायदा?
ज्ञापन में सबसे तीखा और सनसनीखेज आरोप खाद्य निरीक्षक पर लगाया गया है। शिकायत में स्पष्ट कहा गया है कि:
> *”विशेषकर शहरी एरिया में *खाद्य निरीक्षक संतोष कंवर* के संरक्षण में पीडीएस के चावल की (खरीदी-बिक्री) रीसाइक्लिंग दिन-रात हो रही है। संतोष कंवर जिला खाद्य अधिकारी का तथाकथित रिश्तेदार होने के नाते, खाद्य अधिकारी का इस भ्रष्टाचारी गतिविधियों में उसको संरक्षण प्राप्त है।”*
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आरोप है कि खाद्य निरीक्षक और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही कोरबा में मिलर दिन-दहाड़े गरीबों के चावल की रीसाइक्लिंग कर रहे हैं और प्रशासन मौन साधे बैठा है।
सरकार और व्यवस्था पर तीखे सवाल!
1. *’जीरो टॉलरेंस’ के दावों का क्या?* : राज्य सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करती है, लेकिन जब जिम्मेदार अधिकारी ही भ्रष्टाचार के संरक्षक बन जाएं, तो सरकार की छवि धूमिल होना तय है।
2. *रिश्तेदारी के आगे पंगु हुआ कानून?* : क्या जिला खाद्य अधिकारी के तथाकथित रिश्तेदार होने का फायदा उठाकर अधिकारियों को भ्रष्टाचार करने की खुली छूट दी गई है?
3. *तकनीकी निगरानी और ऐप सिर्फ कागजों पर?* : जब सरकार सीसीटीवी (CCTV), जीपीएस ट्रैकिंग (GPS) और मोबाइल ऐप से निगरानी की बात करती है, तब शहर के बीचों-बीच खुलेआम चावल की रीसाइक्लिंग कैसे हो रही है?
संगठन की प्रमुख मांगें:
**निष्पक्ष जांच:** पूरे मामले, पीडीएस दुकानदारों और संलिप्त राइस मिलर्स की गहन व निष्पक्ष जांच कराई जाए।
**दुकानदारों के लाइसेंस रद्द हों:** जिन दुकानों और मिलों में अनियमितता सिद्ध हो, उनके लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त किए जाएं।
**कड़ी निगरानी व्यवस्था:** चावल वितरण व परिवहन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए जीपीएस, सीसीटीवी और मोबाइल ऐप से कड़ी निगरानी की जाए।
**दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई:** भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले खाद्य निरीक्षक और संबंधित अफसरों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि कलेक्टर महोदय इस गंभीर शिकायत और तीखे आरोपों के बाद भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों और मिलर्स पर क्या कार्रवाई करते हैं, या यह मामला भी जांच की फाइलों में दबकर रह जाएगा!



