
1999 से अब तक कोल वाशरी, पावर प्रोजेक्ट, कोयला परिवहन और वित्तीय गतिविधियों की CBI–SIT जांच की मांग; दीपक दुबे ने कहा—“हर टन कोयले का हिसाब सामने आना चाहिए”
कोरबा/दीपका, 18 अगस्त 2026।
ACB समूह की कोल वाशरियों, संबद्ध ताप विद्युत परियोजनाओं, कोयला परिवहन और अन्य औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े कथित तकनीकी, पर्यावरणीय, वित्तीय एवं नियामकीय अनियमितताओं की वर्ष 1999 से वर्तमान तक स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर भारतीय जनाधिकार पार्टी, छत्तीसगढ़ ने मंगलवार को दीपका में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। लगातार बारिश के बीच पार्टी पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता आंदोलन में डटे रहे।
धरना प्रदर्शन के बाद कार्यपालन दंडाधिकारी एवं तहसीलदार दीपका श्री अभिजीत राज भानु के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय कैबिनेट सचिव, केंद्रीय कोयला मंत्री, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री तथा केंद्र एवं राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में CBI जांच, CBI के नेतृत्व में SIT तथा राज्य सरकार द्वारा स्वतंत्र बहु-विभागीय जांच दल गठित करने की मांग की गई।
दीपक दुबे ने उठाया बड़ा सवाल—“मामला सिर्फ वाशरी का नहीं, पूरे कोयला सिस्टम की जांच जरूरी”
आंदोलन के दौरान दीपक दुबे ने कहा कि मामला केवल किसी एक कोल वाशरी तक सीमित नहीं है। कोयले की खदान से लेकर वाशरी, रेलवे साइडिंग, सड़क परिवहन, ताप विद्युत परियोजना और अंतिम उपयोग तक पूरी श्रृंखला की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों में परिलक्षित कोयला आवक-जावक, तौल कांटा, परिवहन दस्तावेज, रेलवे रेक, वाशरी संचालन, रिजेक्ट कोयला, बिजली उत्पादन, पर्यावरणीय रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों का आपस में मिलान कराया जाना चाहिए।
“जांच से पहले किसी मात्रा को अवैध घोषित करने की मांग नहीं है। हमारी मांग साफ है—अभिलेखों में दर्ज हर टन कोयले का स्रोत, परिवहन, प्रसंस्करण, रिजेक्ट, प्रेषण और अंतिम उपयोग सामने आना चाहिए।” — दीपक दुबे
एक करोड़ टन से अधिक परिलक्षित कोयला परिवहन की जांच की मांग
भारतीय जनाधिकार पार्टी ने दावा किया कि उपलब्ध दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर कच्चे एवं रिजेक्ट कोयले के आवागमन के संकेत मिलते हैं। पार्टी ने मांग की है कि यदि अभिलेखीय परीक्षण में एक करोड़ टन से अधिक कोयला आवागमन सामने आता है, तो प्रत्येक टन के स्रोत और अंतिम उपयोग का स्वतंत्र मिलान कराया जाए।
Dipka, Gevra, Kusmunda, Chakabura, Ratija, Renki और Binjhari सहित संबद्ध कोल वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, परिवहन व्यवस्था और अन्य इकाइयों को जांच के दायरे में शामिल करने की मांग की गई है।
रिजेक्ट कोयले की गुणवत्ता और वास्तविक उपयोग की फोरेंसिक जांच
पार्टी ने रिजेक्ट कोयले की मात्रा, गुणवत्ता, ऊष्मीय मान, नमूना परीक्षण, भंडारण, प्रेषण और अंतिम उपयोग की स्वतंत्र फोरेंसिक जांच की मांग की है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यह सत्यापित किया जाए कि कहीं उपयोगी या व्यावसायिक गुणवत्ता वाले कोयले को रिजेक्ट श्रेणी में दर्शाकर उसके उपयोग अथवा विचलन की कोई स्थिति तो नहीं बनी।
कोयला खपत बनाम बिजली उत्पादन का भी हो मिलान
संबद्ध ताप विद्युत परियोजनाओं में वास्तविक कोयला अथवा रिजेक्ट कोयला प्राप्ति, ईंधन खपत, बिजली उत्पादन और राख उत्पादन का तकनीकी मिलान कराने की मांग की गई है।
पार्टी का कहना है कि यदि कोयला प्राप्ति और बिजली उत्पादन के आंकड़ों में असामान्य अंतर सामने आता है तो उसके कारणों और अभिलेखीय आधार की भी जांच होनी चाहिए।
तौल कांटा, GPS, FASTag और CCTV की डिजिटल फोरेंसिक जांच
भारतीय जनाधिकार पार्टी ने संबंधित इकाइयों के तौल कांटा सर्वर, डिजिटल लॉग, GPS, FASTag, RFID, ANPR, CCTV, वाहन रिकॉर्ड, रेलवे रेक, प्रेषण पर्चियों और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित कर स्वतंत्र फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है।
पार्टी ने फर्जी वाहन, दोहरी प्रविष्टि, काल्पनिक यात्राओं, गलत तौल, असामान्य परिवहन हानि अथवा कोयले की मात्रा में कथित हेरफेर जैसी संभावनाओं की वैज्ञानिक जांच की मांग रखी।
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर सवाल
आंदोलनकारियों ने औद्योगिक गतिविधियों से प्रभावित नदी-नालों, भूजल, कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच की मांग की।
लगभग 10 किलोमीटर के प्रभावित क्षेत्र में वायु, धूल, राख, शोर, जल, कृषि भूमि और जनस्वास्थ्य पर औद्योगिक गतिविधियों के प्रभाव का स्वतंत्र सर्वेक्षण कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
डीजल-बायोडीजल, कर लाभ और सरकारी सुविधाओं की जांच
पार्टी ने वर्ष 2015 से वर्तमान तक औद्योगिक डीजल/HSD और बायोडीजल की खरीद, भंडारण, परिवहन एवं वास्तविक उपयोग का वर्षवार मिलान कराने की मांग की।
इसके साथ ही संबंधित कंपनियों को मिले कर लाभ, औद्योगिक प्रोत्साहन, विद्युत शुल्क संबंधी सुविधाओं, निवेश एवं परिवहन प्रोत्साहन तथा अन्य सरकारी लाभों की भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई।
MCCPL के लगभग ₹1,410 करोड़ के अधिग्रहण पर भी सवाल
ज्ञापन में ACB समूह से संबंधित कंपनी MCCPL के JSW Energy द्वारा लगभग ₹1,410 करोड़ के अधिग्रहण/क्रय-विक्रय की भी स्वतंत्र उच्चस्तरीय फोरेंसिक जांच की मांग उठाई गई।
पार्टी ने कंपनी की भूमि एवं परिसंपत्तियों, कोयला लिंकज, विद्युत अनुबंधों, लंबित न्यायालयीन एवं नियामकीय मामलों, वित्तीय एवं कर दायित्वों तथा अधिग्रहण से पूर्व किए गए Due Diligence की जांच कराने की मांग की है।
नियामक विभागों की भूमिका की भी हो समीक्षा
भारतीय जनाधिकार पार्टी ने कहा कि यदि वर्षों से इतनी बड़ी औद्योगिक गतिविधियां संचालित होती रही हैं, तो SECL, पर्यावरण, खनन, राजस्व, वन, श्रम, जल संसाधन सहित संबंधित विभागों द्वारा किए गए निरीक्षण, स्वीकृतियों और कार्रवाई की भी स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए।
यदि जांच में सरकारी निगरानी में लापरवाही या गंभीर चूक सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई।
डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग
पार्टी ने जांच शुरू होने से पहले सभी संबंधित तौल कांटा सर्वर, GPS, FASTag, CCTV, RFID, OCEMS/CEMS, ERP/SAP, ईंधन, कोयला स्टॉक, रेलवे और वित्तीय डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है, ताकि किसी भी संभावित साक्ष्य से छेड़छाड़ अथवा उसके नष्ट होने की आशंका न रहे।
11 सितंबर को SECL मुख्यालय बिलासपुर में अगला आंदोलन
भारतीय जनाधिकार पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि ज्ञापन पर केंद्र एवं राज्य सरकार तथा संबंधित जांच एजेंसियों की ओर से समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है, तो 11 सितंबर 2026 को SECL मुख्यालय, बिलासपुर के समक्ष शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
पार्टी ने इसके बाद 2 अक्टूबर को दीपका-गेवरा क्षेत्र में ‘इंसानियत सभा’ आयोजित करने की भी घोषणा की है।
बारिश के बीच सैकड़ों कार्यकर्ता रहे मौजूद
धरना प्रदर्शन में भारतीय जनाधिकार पार्टी के कमल किशोर साव, कृष्ण टंडन, हेमंत पैगवार, संजय रत्नाकर, संतोष अनंत, अमर खांडे, बजरंग रत्नाकर, शिव चौरसिया, जय सेवायक, शैलेन्द्र गोपाल, राकेश कुर्रे, करण लहरे, देव प्रसाद, प्रमोद यादव, राजेंद्र, अनिल कश्यप, तरुण कश्यप, किशन, शुक्रिता कुर्रे, लाल चौहान, लकी दिवाकर, आशीष तिवारी, नीरज, रामचंद्र कंवर, गणेश कश्यप, नकुल सूर्यवंशी, यशवंत सूर्यवंशी, शिवचरण और योगेश सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं प्रभावित ग्रामों के लोग मौजूद रहे।
पार्टी ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों में पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक संसाधनों की जवाबदेही और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर है। ACB समूह से जुड़े आरोपों और दावों की अंतिम सत्यता जांच एजेंसियों की स्वतंत्र जांच के बाद ही निर्धारित हो सकेगी।



