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10 रुपये पार्किंग शुल्क लिया, फिर बाइक चोरी! जिला अस्पताल की पार्किंग व्यवस्था पर बड़ा सवाल… देखें वीडियो

पार्किंग संचालक शुल्क लेता है तो वाहन की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी? रसीद हाथ में, बाइक गायब—अस्पताल प्रबंधन से जवाब की मांग

कोरबा। कोरबा के 100 बेड जिला अस्पताल की पार्किंग व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत के मुताबिक, अस्पताल परिसर की पार्किंग में बाइक खड़ी करने के लिए वाहन मालिक से 10 रुपये पार्किंग शुल्क लिया गया और इसकी बाकायदा रसीद भी दी गई। लेकिन इसके बाद पार्किंग से एक बाइक चोरी होने का मामला सामने आया है। वाहन नंबर 2663 बताया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पार्किंग संचालक वाहन खड़ा करने के एवज में शुल्क वसूल रहा है, तो वाहन की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

पीड़ित पक्ष के पास पार्किंग शुल्क की रसीद मौजूद होने की बात कही जा रही है। ऐसे में पार्किंग व्यवस्था की निगरानी, प्रवेश-निकास पर नियंत्रण और वाहनों की सुरक्षा को लेकर अस्पताल प्रबंधन तथा पार्किंग संचालक की भूमिका पर सवाल उठना लाजिमी है।

🔴 शुल्क लिया तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए!

अस्पताल आने वाले मरीज और उनके परिजन पहले ही इलाज की परेशानियों से जूझते हैं। ऐसे में पार्किंग के नाम पर शुल्क लेने के बावजूद यदि वाहन सुरक्षित नहीं रह पा रहे हैं, तो यह पूरी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि अगर पार्किंग संचालक वाहन की सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं लेता, तो फिर पार्किंग शुल्क किस बात का लिया जा रहा है? वहीं, यदि शुल्क लेकर वाहन पार्किंग में स्वीकार किया गया है, तो चोरी की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था भी स्पष्ट होनी चाहिए।

⚠️ अस्पताल प्रबंधन से उठे ये सवाल

– पार्किंग शुल्क लेने के बाद वाहन की निगरानी कौन करता है?
– पार्किंग में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था है या नहीं?
– वाहन के प्रवेश और निकासी का कोई रिकॉर्ड रखा जाता है या नहीं?
– बाइक चोरी होने के बाद पार्किंग संचालक की क्या जिम्मेदारी बनती है?
– क्या अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जांच शुरू की है?
– मरीजों और परिजनों से लिए जा रहे पार्किंग शुल्क के बदले उन्हें कौन-कौन सी सुरक्षा सुविधाएं दी जा रही हैं?

मरीजों और उनके परिजनों ने पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने, पार्किंग व्यवस्था की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों पर उचित कार्रवाई की मांग की है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला अस्पताल प्रबंधन और संबंधित अधिकारी इस मामले में पार्किंग संचालक की जिम्मेदारी तय करते हैं या फिर पार्किंग शुल्क लेकर वाहन चोरी के मामले को भी महज शिकायत बनाकर छोड़ दिया जाता है।

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