
• प्रेम विवाह के महज एक साल बाद वारदात: साक्ष्य मिटाने के लिए रची थी आत्महत्या की साजिश
• कोरबा के तृतीय अपर सत्र न्यायालय का बड़ा फैसला, आरोपी को धारा 103(1) और 238 BNS में सजा…
कोरबा छत्तीसगढ़ | कोरबा के चर्चित सुषमा खुसरो हत्याकांड में न्याय का फैसला आ गया है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार नंदे की अदालत ने मंगलवार को अहम निर्णय सुनाते हुए मृतका के पति और हत्या के आरोपी अभिनेक कुमार लंदेर को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत आजीवन कारावास व ₹100 अर्थदंड और धारा 238 (साक्ष्य मिटाने) के तहत 3 वर्ष के कठोर कारावास व ₹100 अर्थदंड की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।
क्या थी पूरी घटना?
मामले के अनुसार, 22 जुलाई 2025 को गोकुल नगर स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के एक किराए के मकान में यह वारदात हुई थी। घटना वाले दिन सुबह सुषमा ने पति से फिल्म ‘निहारिका’ देखने जाने की बात कही थी, जिस पर दोनों के बीच विवाद हो गया। विवाद के बाद आरोपी काम पर चला गया, लेकिन दोपहर में लौटने के बाद उसने साजिशन तकिए से मुंह और नाक दबाकर पत्नी की हत्या कर दी।
हत्या के बाद आरोपी ने वारदात को हादसे या आत्महत्या का रूप देने के लिए शव के पास कपड़े और कागज एकत्र कर आग लगा दी। इसके बाद उसने नाटक रचते हुए यह जताने की कोशिश की कि घर अंदर से बंद था और उसने खिड़की से धुआं निकलता देख बालकनी के रास्ते अंदर प्रवेश किया था।
प्रेम विवाह का दर्दनाक अंत
अदालत के दस्तावेजों के मुताबिक, दोनों की पहचान वर्ष 2023 में हुई थी, जिसके बाद 5 मई 2024 को बिलासपुर के आर्य समाज मंदिर में उन्होंने प्रेम विवाह किया था। विवाह के बाद से ही दोनों कोरबा में रह रहे थे, लेकिन शादी के महज एक साल बाद ही यह दुखद घटना घटित हो गई।
मजबूत साक्ष्यों और अभियोजन की पैरवी ने दिलाई सजा
मामले की जांच के दौरान पुलिस और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने आरोपी की पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया। अदालत ने गवाहों और वैज्ञानिक प्रमाणों को आधार मानते हुए माना कि आरोपी ने पहले जानबूझकर हत्या की और फिर सबूत मिटाने का प्रयास किया।
प्रकरण में शासन (अभियोजन पक्ष) की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक कृष्ण कुमार द्विवेदी ने मजबूत और प्रभावी पैरवी की, जिसकी बदौलत आरोपी को सख्त सजा दिलाने में सफलता प्राप्त हुई।
अदालत द्वारा सुनाई गई सजा:
* धारा 103(1) BNS (हत्या): आजीवन कारावास + ₹100 अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1 माह अतिरिक्त कारावास)।
* धारा 238 BNS (साक्ष्य मिटाना): 3 वर्ष कठोर कारावास + ₹100 अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1 माह अतिरिक्त कारावास)।



