
पहले एक और फिर दूसरे नवजात ने भी तोड़ा दम, 14 बिंदुओं पर जांच की मांग; अस्पताल के बाहर हंगामा, नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन।

कोरबा। शहर के आयुष्मान हॉस्पिटल में जन्मे जुड़वा नवजातों की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। पहले एक नवजात की मौत हुई, जबकि गंभीर हालत में बिलासपुर रेफर किए गए दूसरे नवजात ने भी उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। दोनों बच्चों की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही मानिकपुर चौकी प्रभारी परमेश्वर राठौर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। परिजनों ने पुलिस और प्रशासन के सामने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

पीड़ित पक्ष के संदीप कुमार ने बताया कि आयुष्मान हॉस्पिटल में जन्मे जुड़वा बच्चों में पहले एक की मौत हुई और बाद में इलाज के लिए रेफर किए गए दूसरे बच्चे ने भी दम तोड़ दिया। उनका आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई। उन्होंने कहा कि अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों की योग्यता, इलाज की प्रक्रिया, नवजातों की निगरानी सहित 14 बिंदुओं पर जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
शाम को नायब तहसीलदार दीपक पटेल मौके पर पहुंचे, जहां परिजनों ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर अस्पताल प्रबंधन पर समय पर सही जानकारी नहीं देने और इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।
नायब तहसीलदार दीपक पटेल ने बताया कि परिजनों ने दोनों नवजातों की मौत के मामले में 14 बिंदुओं पर जांच की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा है। मामले से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। उनके निर्देश पर जांच टीम गठित कर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अस्पताल प्रबंधन पर लगाए गए लापरवाही के आरोप पर अभी आधिकारिक जांच होना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि किसी प्रकार की चिकित्सीय या प्रशासनिक लापरवाही हुई थी या नहीं।



