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शबरी वाचनालय से जनजातीय विरासत को नया मंच,राज्यपाल रमेन डेका ने उद्घाटन किया; बालिकाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का संदेश…

रायपुर / वनवासी विकास समिति, रायपुर (छत्तीसगढ़) द्वारा स्थापित नया प्रकल्प “शबरी वाचनालय” मंगलवार को शबरी कन्या आश्रम परिसर, रोहिणीपुरम, रायपुर में भव्य रूप से उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के माननीय राज्यपाल श्री रमेन डेका थे, जिन्होंने वाचनालय का उद्घाटन कर इस पहल को राज्य और जनजातीय संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण बताया। समारोह की अध्यक्षता वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री उमेश कच्छप ने की। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री अतुल जोग मुख्य वक्ता रहे।पूरे कार्यक्रम का संचालन श्री राजीव शर्मा ने किया ।

मुख्य बिंदु
• उद्घाटन स्थल: शबरी कन्या आश्रम परिसर, रोहिणीपुरम, रायपुर।
• प्रमुख अतिथि: राज्यपाल श्री रमेन डेका।
• अध्यक्षता: श्री उमेश कच्छप।
• मुख्य वक्ता: श्री अतुल जोग।
• मुख्य आयोजन: दीप प्रज्ज्वलन, वाचनालय उद्घाटन, राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, राज्यगीत, स्वागत नृत्य और एकल गीत “राष्ट्र विजयी हो हमारा”।
• उद्देश्य: जनजातीय इतिहास, भाषा और लोक परंपराओं के संरक्षण के साथ बालिकाओं की शिक्षा व आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना।


समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और वाचनालय उद्घाटन से हुई। शबरी कन्या आश्रम की छात्राओं ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया तथा “राष्ट्र विजयी हो हमारा” एकल गीत प्रस्तुत किया। श्री अनुराग जैन ने वनवासी विकास समिति एवं वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज उत्थान के क्षेत्र में चलाई जा रही पहलों का संक्षेप में परिचय दिया, जिसमें पूर्वोत्तर भारत की बालिकाओं के छात्रावास, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ और शैक्षिक प्रकल्प शामिल हैं।

अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री अतुल जोग ने कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम 1952 में जशपुर से प्रारम्भ हुआ था। उन्होंने औपनिवेशिक मिथ्याप्रचारों को चुनौती दी और बताया कि जनजातीय समाज पारस्परिक सहयोग, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण है। श्री जोग ने आश्रम से निकली अनेक बालिकाओं के डॉक्टर, प्रोफेसर, तहसीलदार, पुलिस अधिकारी, सेना और महिला कमांडो के रूप में देश सेवा में योगदान का उल्लेख किया।

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा, “शबरी वाचनालय जैसी पहल समाज के उत्थान और संस्कृति के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।” उन्होंने PVTG (अत्यंत पिछड़ी जनजातियाँ) के संरक्षण, उनकी संस्कृति के संवर्धन और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए सतत प्रयासों पर बल दिया। साथ ही उन्होंने जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों एवं वीरांगनाओं—विशेषकर रानी दुर्गावती—के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का आह्वान किया। राज्यपाल ने शबरी आश्रम में शिक्षा के साथ नैतिक मूल्य और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने की प्रशंसा की और नागरिकों से समाजहित में कम-से-कम एक रचनात्मक कार्य करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के अंत में वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री उमेश कच्छप ने माननीय राज्यपाल, मुख्य वक्ता, उपस्थित अतिथियों और सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन के पश्चात राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।

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