
ठेकेदारों की कमाई बढ़ती गई, जनता की परेशानी जस की तस! वार्ड 14 जलभराव ने खोली निगम की पोल.
कोरबा छत्तीसगढ़ // शनिवार 29 अगस्त की बारिश ने एक बार फिर कोरबा नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। वार्ड नंबर 14 चिमनी भट्टा में नाले का पानी लोगों के घरों के अंदर तक पहुंच गया। बताया जा रहा है कि 40 से अधिक घर प्रभावित हुए हैं। राशन, घरेलू सामान और बच्चों की कॉपी-किताब तक पानी में खराब होने की बात सामने आई है।
लेकिन इस बार सवाल सिर्फ बारिश का नहीं है।
असली सवाल—जब हर साल नाला बनता है, तो पानी घरों में क्यों आता है?
चिमनी भट्टा में नाला निर्माण और जल निकासी के नाम पर हर साल टेंडर निकलने और काम होने की बात सामने आती रही है। अगर लगातार वर्षों से नाला निर्माण, सुधार और सफाई के कार्य कराए जा रहे हैं, तो फिर जलभराव की समस्या आज भी वैसी ही क्यों है?
हर साल टेंडर…
हर साल निर्माण…
हर साल भुगतान…
और हर साल वही जलभराव!
तो फिर सवाल उठना लाजिमी है—
आखिर नाला बन किसके लिए रहा है और पानी जा कहां रहा है?
क्या नाला निर्माण का काम सिर्फ कुछ हिस्सों में कराकर खानापूर्ति की जा रही है?
क्या बड़े और स्थायी जल निकासी समाधान की जगह हर साल थोड़ा-बहुत काम करके जनता को गुमराह किया जा रहा है?
क्या पुराने काम की उपयोगिता और गुणवत्ता की जांच होती है?
और सबसे बड़ा सवाल—
🚨 अगर वर्षों से करोड़ों रुपये नाला निर्माण और जल निकासी पर खर्च हुए हैं, तो उसका परिणाम जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा?
स्थानीय लोगों की परेशानी देखकर ऐसा लगता है कि कागजों में नाले बनते रहे, लेकिन जमीन पर जलभराव खत्म नहीं हुआ।
‘टेंडर का खेल’ या जल निकासी का समाधान?
जनता के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि हर साल नए टेंडर और छोटे-छोटे निर्माण कार्यों के जरिए समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय बार-बार उसी समस्या पर पैसा खर्च किया जा रहा है?
यदि ऐसा है तो यह गंभीर जांच का विषय है।
हालांकि करोड़ों रुपये की बंदरबांट या भ्रष्टाचार का आरोप बिना जांच के साबित नहीं माना जा सकता, लेकिन जनता के सामने मौजूद सवालों का जवाब देना नगर निगम और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी जरूर है।
कितने टेंडर निकले?
कितनी लागत स्वीकृत हुई?
किस ठेकेदार को काम मिला?
कितना काम मौके पर हुआ?
कितना भुगतान किया गया?
काम की गुणवत्ता की जांच किसने की?
और पुराने नाले के बावजूद नया टेंडर क्यों जरूरी पड़ा?
इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होने चाहिए।
वार्ड 14 भी जलभराव से परेशान—फिर तैयारियां कहां थीं?
वार्ड नंबर 14 में भी जलभराव की समस्या ने निगम की बारिश पूर्व तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं।
अगर नगर निगम को पहले से पता है कि इन इलाकों में बारिश के दौरान जलभराव होता है, तो फिर मानसून से पहले स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया?
बारिश हर साल आती है, समस्या हर साल आती है, टेंडर भी हर साल आते हैं—लेकिन समाधान कब आएगा?
जनता पूछ रही—नाला बन रहा है या सिर्फ बिल?
आज जरूरत इस बात की है कि नगर निगम सिर्फ जेसीबी लगाकर पानी निकालने तक सीमित न रहे।
चिमनी भट्टा में पिछले कई वर्षों में हुए नाला निर्माण और जल निकासी के सभी कार्यों का सोशल ऑडिट और तकनीकी जांच होनी चाहिए।
टेंडर से लेकर भुगतान तक पूरा रिकॉर्ड सामने आना चाहिए।
कौन सा ठेकेदार था?
कितनी राशि स्वीकृत हुई?
कितनी राशि का भुगतान हुआ?
काम कितना हुआ?
काम की गुणवत्ता कैसी थी?
और सबसे महत्वपूर्ण—काम होने के बाद भी जलभराव क्यों नहीं रुका?
जनता के घर डूबे, अब फाइलें भी खुलनी चाहिए!
यह सिर्फ पानी भरने की खबर नहीं है।
यह सवाल है जनता के पैसों के इस्तेमाल का।
यदि हर साल नाला निर्माण के नाम पर पैसा खर्च होता है और फिर भी जनता को अपने घरों से पानी निकालना पड़ता है, तो कहीं न कहीं व्यवस्था में गंभीर कमी जरूर है।
ठेकेदार अपना काम पूरा बताएं, निगम अपने भुगतान का हिसाब दे और अधिकारी अपनी निगरानी का जवाब दें।
जनता को अब सिर्फ आश्वासन नहीं चाहिए।
🔥 जनता का सीधा सवाल—
हर साल नाला निर्माण होता है तो जलभराव खत्म क्यों नहीं होता?
हर साल टेंडर होता है तो स्थायी समाधान क्यों नहीं होता?
हर साल पैसा खर्च होता है तो नाला बारिश में फेल क्यों हो जाता है?
क्या छोटे-मोटे काम दिखाकर बड़े समाधान का भ्रम पैदा किया जा रहा है?
और अगर काम सही हुआ है, तो फिर जनता के घरों में नाले का पानी क्यों?
कोरबा नगर निगम जवाब दे!
टेंडर किसके लिए?
काम किसका?
भुगतान कितना?
जवाबदेही किसकी?
और जनता को राहत कब?
बारिश का पानी उतर जाएगा…
लेकिन हर साल जनता के घर में घुसने वाला पानी अब नगर निगम की फाइलों और ठेकों पर भी सवाल छोड़ गया है।
चिमनी भट्टा से वार्ड 14 तक जनता की एक ही मांग—टेंडर नहीं, अब स्थायी समाधान चाहिए!
🚨 “हर साल नाला, हर साल टेंडर… फिर भी जनता पानी-पानी—आखिर खेल कहां है?”



