शासन प्रशासन को चुनौती: शासकीय भूमि पर कब्जा नहीं कर पाने से जमीन दलालों का नया कारनामा आया सामने, किसी अन्य व्यक्ति को शासकीय भूमि का मालिक बनाकर ला रहे सामने…

जमीन दलालों की बढ़ती संलिप्तता के कारण धोखाधड़ी के मामले अब थाने तक पहुँचने लगे हैं। आदिवासियों के अलावा गैर आदिवासी जमीन दलालों के कारण जहां धोखाधड़ी बढ़ती जा रही है। जमीन दलालों ने शासकीय भूमि को भी अपना या फर्जी जमीन मालिक बनाकर ज़मीन दलालों द्वारा शासकीय भूमि को अपना बताकर उसे बेचने का काम किया जा रहा है। एक ऐसा ही मामला….

कोरबा छत्तीसगढ़ // शासकीय भूमि को लेकर दादर खुर्द मानिकपुर डिपरापरा में मामला गरमाता ही जा रहा है। कुछ दिन पूर्व वही प्रशासन के द्वारा शासकीय अभिलेखों में दर्ज जिसका खसरा नंबर 1125 है। जिस पर ज़मीन दलालों लक्ष्मण लहरे, सीताराम चौहान, राजू सीमोन और सोनू जैन के द्वारा सरकारी जमीन को JCB से खोदकर कब्जा करने की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन के द्वारा टीम गठित कर मौका मुआयना कर जांच किया गया। जांच में पाया गया था कि खसरा नंबर 1125 शासकीय जमीन है। जिस पर प्रशासन के द्वारा साइन बोर्ड लगाया गया। ताकि भविष्य में किसी भी जमीन दलालों की यह अन्य व्यक्ति के द्वारा सरकारी जमीन पर कब्ज़ा ना हो सके।
अब जमीन दलालों का नया कारनामा आया सामने
शासकीय भूमि पर कब्जा नहीं कर पाने से जमीन दलालों द्वारा पटवारी, आर आई, एसडीएम पर झूठा आरोप लगा रहे हैं कि खसरा नंबर 1125 जो शासकीय भूमि है। उसे जबरन अपना होना बता रहे हैं। जबकि शत्रुघ्न सिंह राजपूत जो कि खसरा नंबर 1125 जो शासकीय है उक्त सरकारी जमीन पर अपना दावा कर रहा है। जबकि शत्रुहन राजपूत का वहाँ कभी कब्ज़ा ही नहीं रहा है। ऐसा क्षेत्र के लोगों के द्वारा बताया गया है।जबकि प्रशासन को चुनौती देते हुए शत्रुघन सिंह राजपूत के द्वारा शासकीय ज़मीन पर बोर्ड लगा दिया है और शासन को चुनौती दे रहा है। इनका एक ही काम है कि जमीन दलालों के साथ मिलकर शासकीय भूमि पर कब्जा कर प्लाट काट काट कर लाखों करोड़ों रुपये में बेचना, जब कब्जा नहीं कर पाते तो प्रशासन पर झूठा आरोप लगाते है।
अब आगे देखने वाली बात यह होगी कि शासन प्रशासन के द्वारा जमीन दलालों और जो फर्जी जमीन मालिक बन कर सामने आ रहे हैं उन पर क्या कार्रवाई की जाती है।



