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32 करोड़ का घोटाला 100 करोड़ तक पहुंचा: रायपुर से शुरू हुई घोटाले की जांच 11 जिलों तक पहुंची…

पटवारी तहसीलदार व एसडीएम ही आरोपी…

रायपुर से विशाखापट्टनम के बीच निर्माणाधीन भारतमाला प्रोजेक्ट की जांच रायपुर से शुरू होकर 11 अन्य जिलों तक पहुंच गई है… प्रारंभिक जांच में एजेंसियों ने 32 करोड़ रुपए का मुआवजा घोटाला पाया था। जैसे जैसे जांच बढ़ी, वैसे वैसे ही आंकड़ा 100 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

अब तक 12 बारह से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ईडी और ईओडब्ल्यू की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि मुआवजा घोटाले में राजस्व विभाग के पटवारी, तहसीलदार और एसडीएम स्तर के अधिकारियों ने प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े दलालों के साथ मिलकर गड़बड़ी की।

इसमें किसी भी जिले के कलेक्टर की भूमिका सामने नहीं आई है। उन्होंने राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा फाइलों पर हस्ताक्षर कर आगे बढ़ाया। इसमें किसानों को भी गुमराह किया गया। जांच में यह एक प्री प्लान घोटाला सामने आया है। जमीन अधिग्रहण की जानकारी पहले ही लीक कर दी गई थी।

जिसके चलते प्रभावशाली और आर्थिक रूप से मजबूत लोगों ने प्रोजेक्ट मार्ग के आसपास की जमीन पहले ही खरीद ली थी।

  1. इन्हें किया गया गिरफ्तार: ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन पटवारी गोपाल राम वर्मा, पीएचई अधिकारी नरेंद्र नायक, गृहिणी उमा तिवारी उनके पति केदार तिवारी, हरमीत सिंह खनूजा, विजय जैन, खेमराज कोसले, पुन्नू राम देशलहरे, भोजराम साहू, अभनपुर नगर पंचायत अध्यक्ष कुंदन बघेल और एसडीएम निर्भय साहू को गिरफ्तार किया है अधिकांश आरोपी जमानत पर बाहर हैं।
  2. इन अधिकारियों की भूमिका की जांच: तत्कालीन आरआई रोशनलाल वर्मा, तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, नायाब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण, पटवारी जितेंद्र साहू, बसंती धृतलहरे, दिनेश पटेल और लेख राम देवांगन की भूमिका की जांच की जा रही है। इन सभी को नोटिस जारी किए गए हैं और फिलहाल ये प्रहार बताए जा रहे हैं।

इन जिलों में चल रही जांच

दोनों एजेंसियों की रायपुर, धमतरी, कांकेर, कोडागाँव, बस्तर, बिलासपुर, जांजगीर चांपा, रायगढ़, जशपुर, सरगुजा, दुर्ग और राजनांदगांव में जांच चल रही है। इन जिलों में भारत माता प्रोजेक्ट के कार्य चल रहे हैं। हालांकि, कई जगहों पर सुनोजित तरीके से जमीन की खरीदी बिक्री की गई, जिसे आरोपी सीधे पकड़ में नहीं आ रहे हैं।

प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले जमीन खरीदी गई और बाद में उसका बंटवारा कर मुआवजा पास कराया गया। सबसे ज्यादा गड़बड़ी रायपुर में सामने आई है। जहां बैक डेट में सीमांकन कर मुआवजा पास किया गया। इस मामले में जल्द ही ईओडब्ल्यू जांच पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट पेश करेगी।

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