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900 करोड़ का बजट… फिर भी ‘नारकीय’ सफर! कोरबा की सड़कों पर फूटा ‘कृपाराम’ का गुस्सा, CM और कलेक्टर को लिखा ‘पत्र’…

कोरबा छत्तीसगढ़ // भारी-भरकम बजट, चमचमाती फाइलें और धरातल पर… घुटने-घुटने पानी और कमरतोड़ गड्ढे! जी हां, यह कहानी है ऊर्जाधानी कोरबा की, जहां की बदहाल सड़कों और ‘स्वीमिंग पूल’ बनी नालियों ने अब सियासी पारा गरमा दिया है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष **कृपाराम साहू** ने अब सीधे ‘ऊपर’ तक मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री, कलेक्टर और निगम कमिश्नर को पत्र भेजकर पूछा है कि आखिर जनता को इस ‘नारकीय’ वीआईपी ट्रीटमेंट से कब आजादी मिलेगी?

💸 बजट का ‘पहाड़’, विकास का ‘गड्ढा’!

नेता प्रतिपक्ष ने नगर निगम और प्रशासन की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। उन्होंने आंकड़ों का ऐसा ‘बम’ फोड़ा है जिसे सुनकर साहबों को पसीना आ जाए:
**₹900 करोड़:** नगर निगम का सालाना बजट (जी हां, चौंकिए मत!)
**₹600 करोड़:** डीएमएफ (DMF) का भारी-भरकम फंड।
**करोड़ों का एक्स्ट्रा तड़का:** सीएसआर (CSR), अधोसंरचना और राजस्व की अलग से बारिश।
> “जब खजाने में कुबेर का धन भरा है, तो फिर कोरबा की सड़कें आईसीयू (ICU) में क्यों हैं? जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा आखिर जा कहां रहा है?”

🚗 ‘ट्रैफिक जाम’ अब कोरबा का नया परमानेंट एड्रेस

साहू जी ने अपने पत्र में दर्द बयां किया है कि कोरबा की सड़कें अब सड़कें नहीं रहीं, बल्कि ‘क्रेजी भूलभुलैया’ बन चुकी हैं।
* व्यस्त इलाके इतने संकरे हैं कि गाड़ी निकालना ‘मिशन इम्पॉसिबल’ जैसा लगता है।
* गड्ढों के बीच से रास्ता खोजना पड़ता है।
* ऑफिस जाना हो या घर लौटना, लंबे जाम में फंसकर टाइमपास करना अब कोरबावासियों का ‘डेली रूटीन’ बन चुका है।

🌧️ पहली ही बारिश ने किया ‘जलसा’, निगम का दावा हुआ ‘हवा’

विपक्ष का आरोप है कि मानसून आने से पहले चिल्ला-चिल्ला कर कहा गया था कि ‘नालियां साफ कर लो भाई!’, लेकिन निगम तो कुंभकर्णी नींद में था। नतीजा? **पहली ही बारिश में सिस्टम का ‘सर्फ एक्सल’ से भी साफ धो डाला!**
* रिहायशी इलाकों और संकरी गलियों में अब घुटनों तक पानी है।
* नालियों का गंदा और बदबूदार पानी सड़कों पर ‘कैटवॉक’ कर रहा है।
* राहगीर परेशान हैं, दुकानदार अपनी किस्मत को रो रहे हैं और निगम चैन की बंसी बजा रहा है।

🔥 नेता प्रतिपक्ष की ‘अल्टीमेटम’ वाली मांगें:

साहू ने सीधे मुख्यमंत्री और कलेक्टर से गुहार लगाई है कि जनता को इस रोज़-रोज़ के टॉर्चर से बचाया जाए। उनकी डिमांड लिस्ट एकदम क्लियर है:
1. **पैचवर्क नहीं, परमानेंट इलाज:** जर्जर सड़कों की पैचिंग के नाम पर खानापूर्ति बंद हो, तुरंत मरम्मत और जीर्णोद्धार हो।
2. **सड़कें चौड़ी करो, टेंशन कम करो:** जाम से मुक्ति के लिए मुख्य और व्यस्त मार्गों का तुरंत चौड़ीकरण किया जाए।
3. **सुगम आवागमन:** जनता को ‘गड्ढामुक्त’ और ‘जाममुक्त’ कोरबा का हक मिले।
**अब देखना यह है कि इस तीखे पत्र के बाद निगम के ‘इंजीनियर और अधिकारी’ जागते हैं या फिर जनता को ऐसे ही हिचकोले खाते हुए सफर करना पड़ेगा!**

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