
अपर सत्र न्यायाधीश सीमा प्रताप चंद्रा ने सुनाई सजा | 27 अक्टूबर 2025 को सिविल लाइन थाना क्षेत्र में हुई थी घटना | BNS की धारा 64 व पॉक्सो एक्ट 4 में केस | विशेष लोक अभियोजक सुनील कुमार मिश्रा ने की पैरवी |
कोरबा // ट्यूशन पढ़ने आई नाबालिग छात्रा से गलत हरकत करने वाले शिक्षक को कोरबा की अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी कोर्ट ने दोषी ट्यूशन टीचर को 20 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। मामले में करीब आठ महीने तक चली सुनवाई के बाद यह फैसला आया है।
*गोकुल नगर में चलाता था ट्यूशन*
विशेष लोक अभियोजक सुनील कुमार मिश्रा के अनुसार, मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित गोकुल नगर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का है। मूल रूप से बिहार के मोतिहारी जिले के जिहुली निवासी नरेंद्र कुमार उर्फ नरेंद्र शर्मा उर्फ नागेंद्र अपने घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था।
*अन्य बच्चों को भेजकर की हरकत*
घटना 27 अक्टूबर 2025 की शाम करीब 4 बजे की है। पीड़ित छात्रा ट्यूशन पढ़ने आरोपी के घर पहुंची थी। आरोप है कि शिक्षक ने बहाना बनाकर अन्य छात्रों को घर भेज दिया और छात्रा को अकेला पाकर उसके साथ गलत हरकत शुरू कर दी।
*रोते हुए मां को बताई आपबीती*
छात्रा किसी तरह आरोपी के चंगुल से निकलकर अपने घर पहुंची और रोते हुए पूरी घटना अपनी मां को बताई। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजन छात्रा को लेकर थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई।
*त्काल गिरफ्तारी, पॉक्सो में केस*
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत अपराध दर्ज किया गया।
*पर्याप्त सबूतों पर दोषी करार*
मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी सीमा प्रताप चंद्रा की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त सबूत और गवाह पेश किए, जिन्हें अदालत ने महत्वपूर्ण माना। सबूतों और दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने आरोपी नरेंद्र कुमार को दोषी करार दिया।
*20 साल जेल + जुर्माना*
अदालत ने दोषी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही एक हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने आदेश में कहा कि यदि दोषी अर्थदंड जमा नहीं करता तो उसे दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
*8 महीने में आया फैसला*
मामले में करीब आठ महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया गया। अभियोजन पक्ष का कहना है कि पुलिस की प्रभावी जांच और न्यायालय में मजबूत पैरवी के चलते आरोपी को कड़ी सजा दिलाई जा सकी।



