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जग्गी हत्याकांड : अमित जोगी दोषी करार, 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश, हाई कोर्ट ने पलटा फैसला, पढ़िए क्या है पूरा मामला…

2003 के रामावतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने सीबीआई की अपील स्वीकार करते हुए पूर्व सीएम अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।

➡️ छत्तीसगढ़ रामावतार जग्गी हत्याकांड: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अमित जोगी को तीन सप्ताह में सरेंडर करने का आदेश।
➡️ पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को ट्रायल कोर्ट से मिली थी राहत, हाईकोर्ट ने पलटा फैसला।
➡️ सीबीआई की अपील स्वीकार, रामावतार जग्गी के बेटे ने हत्या को राजनीतिक साजिश बताया था।
➡️ 2003 में हुई थी रामावतार जग्गी की हत्या, मामले में 31 लोग थे आरोपी।

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने पलटा पुराना फैसला


गुरुवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने पहले के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को बरी कर दिया था। सुनवाई के दौरान रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता की हत्या एक राजनीतिक साजिश के तहत कराई गई थी। सीबीआई ने इस मामले में करीब 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी। इसमें हत्या से जुड़े कई अहम सबूत शामिल बताए गए हैं। इन सबूतों को आधार मानते हुए हाईकोर्ट ने सीबीआई की अपील स्वीकार कर ली।

क्या है रामावतार जग्गी हत्याकांड?


4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह मामला उस समय काफी चर्चा में रहा था। इस केस में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। बाकी आरोपियों में से अधिकांश को अदालत ने सजा सुनाई थी। हालांकि, 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट से होते हुए हाईकोर्ट पहुंचा मामला

अमित जोगी के बरी होने के खिलाफ रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई के दौरान अमित जोगी के पक्ष में स्टे मिल गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को दोबारा सुनवाई के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया था। करीब दो साल पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस हत्याकांड के अन्य दोषियों की अपील खारिज करते हुए उनकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। अब सीबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अमित जोगी को तीन सप्ताह में सरेंडर करने का आदेश दिया है।

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