
कोरबा। मिट्टी की खुशबू, मांदर की थाप, लोकगीतों की मिठास और सिर पर सजी भोजली… 29 अगस्त को कोरबा का घंटाघर चौक छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति का जीवंत मंच बनने जा रहा है। छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना द्वारा प्रदेश स्तरीय भोजली रैली एवं महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
यह आयोजन केवल भोजली पर्व मनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति, लोककला और सामाजिक भाईचारे को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश भी देगा।
🌱 भोजली में दिखेगा माटी से जुड़ा रिश्ता
छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा में भोजली का विशेष स्थान है। बारिश के मौसम में मिट्टी और अनाज से जुड़ी यह परंपरा प्रकृति के प्रति आभार और लोकआस्था को दर्शाती है। भोजली के माध्यम से गांव, समाज और परिवार के बीच प्रेम और अपनत्व का रिश्ता मजबूत करने की परंपरा आज भी जीवित है।
🤝 भोजली के साथ मजबूत होंगे सामाजिक रिश्ते
भोजली पर्व की सबसे खास परंपराओं में से एक है मितान संस्कृति। भोजली का तिनका कान में लगाकर एक-दूसरे से मितान बनाने की परंपरा सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देती है।
यही वजह है कि भोजली को सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सामाजिक संस्कृति की पहचान भी माना जाता है।
🥁 लोक कलाकारों से सजेगा घंटाघर
29 अगस्त को होने वाली प्रदेश स्तरीय रैली में अलग-अलग अंचलों से लोक कलाकारों के शामिल होने की बात आयोजकों ने कही है। पारंपरिक लोकनृत्य, लोकगीत, वाद्य यंत्र और सांस्कृतिक झांकियां कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेंगी।
मांदर की थाप और झांझ-मंजीरे की गूंज के बीच पारंपरिक वेशभूषा में महिलाएं सिर पर भोजली का कलश लेकर रैली में शामिल होंगी।
👩🌾 नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की पहल
आयोजकों का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी आधुनिकता और डिजिटल दुनिया से तेजी से जुड़ रही है। ऐसे समय में अपनी मिट्टी, बोली, परंपरा और लोकसंस्कृति से जुड़ाव बनाए रखना बेहद जरूरी है।
भोजली महोत्सव के जरिए करमा, सुआ, पंथी और अन्य लोकपरंपराओं की विरासत को भी आगे बढ़ाने का संदेश दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के प्रदेश संयोजक दिलीप मिरी ने प्रदेशवासियों से बड़ी संख्या में रैली में शामिल होकर भोजली पर्व और छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति के इस उत्सव को सफल बनाने की अपील की है।
पत्रकार वार्ता में जिला संयोजक अतुल दास महंत, प्रदेश उपाध्यक्ष उमा गोपाल, जिलाध्यक्ष एलेक्जेन्डर टोप्पो, महिला विंग जिलाध्यक्ष विमला ध्रुव, मीडिया प्रभारी कन्हैया सुंदर सहित संगठन के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
29 अगस्त को कोरबा का घंटाघर सिर्फ एक रैली का गवाह नहीं बनेगा, बल्कि यहां छत्तीसगढ़ की माटी, मया, संस्कृति और भाईचारे की एक खूबसूरत तस्वीर देखने को मिलेगी।



