
कोरबा छत्तीसगढ़ // औद्योगिक नगरी कोरबा स्थित बालको प्रबंधन पर सैकड़ों LTS संविदा श्रमिकों ने रोजगार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। श्रमिकों का कहना है कि पिछले करीब 22 वर्षों से प्लांट क्रमांक-2 (540 मेगावाट) में सेवाएं देने के बावजूद उनके गेट पास बंद कर दिए गए हैं। साथ ही, उन्हें दूसरी इकाइयों में भेजे जाने से उनकी आय प्रभावित होने की आशंका है।
अचानक गेट पास बंद होने का आरोप
श्रमिकों के मुताबिक, वर्ष 2004 से वे बालको में विभिन्न कार्यों में सेवाएं दे रहे हैं। इनमें कोयला रैक अनलोडिंग जैसे जोखिमपूर्ण कार्य भी शामिल हैं। मजदूरों का आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट लिखित आदेश के उन्हें प्लांट-2 में प्रवेश से रोका जा रहा है और दूसरी इकाइयों में काम करने के लिए कहा जा रहा है।
श्रमिकों का दावा है कि दूसरी इकाइयों में जाने पर उनकी मौजूदा आय में बड़ी कमी आ सकती है, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।
मजदूरों से मिले जयसिंह अग्रवाल, प्रबंधन पर साधा निशाना

अपनी समस्या लेकर श्रमिकों ने पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात की और पूरे मामले की जानकारी दी। श्रमिकों की समस्या सुनने के बाद अग्रवाल ने बालको प्रबंधन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे श्रमिकों के रोजगार और आर्थिक हितों से किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।
श्रम विभाग से हस्तक्षेप की मांग
मामले को गंभीरता से लेते हुए जयसिंह अग्रवाल ने प्रभारी सहायक श्रम आयुक्त नीतेश विश्वकर्मा से बात की और श्रमिकों की समस्या से अवगत कराया। उन्होंने श्रम विभाग से मामले में हस्तक्षेप कर श्रमिकों के मूल कार्यस्थल पर उनकी व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में कार्रवाई की मांग की।
बताया गया है कि श्रम अधिकारी ने मामले में बालको प्रबंधन से चर्चा कर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।
रोजगार बचाने की मांग पर एकजुट LTS श्रमिक
श्रमिकों का कहना है कि यह मामला सिर्फ उनके रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी सीधे प्रभावित होगी। अब सभी की नजरें श्रम विभाग की कार्रवाई और बालको प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं।
फिलहाल LTS श्रमिक अपने रोजगार और पूर्व कार्यस्थल पर काम जारी रखने की मांग को लेकर संघर्षरत हैं।



