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श्री सप्तदेव मंदिर में साकार हुआ वृंदावन धाम, 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए लड्डू गोपाल के दर्शन…

33वें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब, भव्य झांकियों, भजन-कीर्तन और नंदोत्सव ने बांधा समां; कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल व महापौर संजू देवी राजपूत सहित अनेक गणमान्यजन पहुंचे.

कोरबा छत्तीसगढ़ // कोरबा के श्री सप्तदेव मंदिर में आयोजित 33वां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव इस वर्ष श्रद्धा, भक्ति, संस्कृति और उल्लास का अद्भुत संगम बन गया। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मंदिर परिसर की भव्य सजावट, आकर्षक विद्युत रोशनी, जीवंत झांकियों, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों ने ऐसा वातावरण बनाया कि मानो कोरबा में ही वृंदावन धाम साकार हो उठा हो।

सुबह से देर रात तक मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन और भव्य झांकियों का अवलोकन करने के लिए जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। आयोजकों के अनुसार, 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने श्री सप्तदेव मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए।

कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन सहित अनेक गणमान्यजनों ने किए दर्शन

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन, पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, कोरबा महापौर संजू देवी राजपूत, नरेन्द्र देवांगन सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी तथा विभिन्न समितियों के सदस्य श्री सप्तदेव मंदिर पहुंचे।

सभी ने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों और श्रद्धालुओं के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। अतिथियों ने मंदिर परिसर में सजाई गई भव्य झांकियों का अवलोकन किया और आयोजन की भव्यता, धार्मिक वातावरण तथा श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की सराहना की।

गणमान्यजनों एवं विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारियों ने मोदी परिवार एवं कृष्णा ग्रुप को धर्म, संस्कृति एवं सनातन परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों के लिए बधाई दी।

1994 से चली आ रही परंपरा ने लिया विराट स्वरूप

श्री सप्तदेव मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव की परंपरा वर्ष 1994 में शुरू हुई थी। शुरुआत में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित छोटी-छोटी झांकियों के माध्यम से उत्सव मनाया जाता था। समय के साथ श्रद्धालुओं और समाज के सहयोग से यह आयोजन निरंतर विस्तार पाता गया।

आज यही आयोजन कोरबा के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। हर वर्ष जन्माष्टमी के अवसर पर कोरबा ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

भव्य झांकियों में दिखी श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर रामायण-महाभारत तक की झलक

मंदिर परिसर में इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, रामायण, महाभारत और सनातन धर्म की विविध आध्यात्मिक कथाओं पर आधारित आकर्षक एवं जीवंत झांकियां सजाई गईं।

झांकियों में प्रमुख रूप से कारागार में श्रीकृष्ण जन्म, वासुदेव जी द्वारा श्रीकृष्ण को यमुना पार ले जाने का दृश्य, पूतना वध, वकासुर वध, राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकी, श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप, गोवर्धन पर्वत धारण करते भगवान श्रीकृष्ण, श्रीकृष्ण के दशावतार, श्री खाटू श्याम जी, मां राणी सती दादी, द्रोपदी चीरहरण, श्रीराम शिला एवं नल-नील द्वारा रामसेतु निर्माण, अशोक वाटिका में माता सीता और अयोध्या का भव्य श्रीराम मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

इसके अलावा काशी का श्रीकृष्ण मंदिर तथा प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा नशामुक्ति एवं सामाजिक जागरूकता पर आधारित झांकियों ने भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया।

इन झांकियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के साथ भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की गौरवशाली परंपराओं का सजीव दर्शन हुआ।

40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं से गूंजता रहा मंदिर परिसर

जन्माष्टमी के दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना शुरू हो गया था। दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में दर्शन एवं झांकियों को देखने के लिए लंबी कतारें लगी रहीं।

देर रात तक श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने श्री सप्तदेव मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए।

‘लड्डू गोपाल सजाओ प्रतियोगिता’ में महिलाओं ने दिखाया उत्साह

जन्माष्टमी उत्सव से एक दिन पूर्व मंदिर परिसर में महिलाओं के लिए ‘लड्डू गोपाल सजाओ प्रतियोगिता’ आयोजित की गई। बड़ी संख्या में महिलाओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ अपने लड्डू गोपाल को आकर्षक रूप से सजाया।

पूरे परिसर में भक्ति और उत्सव का माहौल देखने को मिला।

नन्हे-मुन्नों ने धारण किया कान्हा और राधा का रूप

बच्चों के लिए विशेष ‘श्रीकृष्ण बनो प्रतियोगिता’ भी आयोजित की गई। दोपहर 3 बजे शुरू हुई प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में बच्चों ने हिस्सा लिया।

प्रतियोगिता को तीन वर्गों में विभाजित किया गया—

– 0 से 2 वर्ष — शिशु कृष्ण बनो
– 3 से 5 वर्ष — बालकृष्ण बनो
– 5 से 10 वर्ष — राधा-कृष्ण बनो

कान्हा, राधा और बाल गोपाल के मनमोहक स्वरूप में सजे नन्हे बच्चों ने सभी का मन मोह लिया। प्रत्येक वर्ग में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए गए, जबकि अन्य बच्चों को सांत्वना पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने किया घोष वंदन

जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा घोष वंदन किया गया। घोष वंदन ने पूरे वातावरण में अनुशासन, राष्ट्रभाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।

वहीं विश्व हिंदू परिषद के स्थापना दिवस के अवसर पर भी मंदिर परिसर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। विहिप से जुड़े पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

शुभम गोयल के भजनों पर देर रात तक झूमे श्रद्धालु

सायंकाल मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ और बढ़ती गई। रात 9 बजे से 1 बजे तक प्रसिद्ध भजन गायक शुभम गोयल ने भजन-कीर्तन की प्रस्तुति दी।

मधुर भजनों पर श्रद्धालु भक्तिरस में डूबे नजर आए। पूरा मंदिर परिसर ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारों से गूंजता रहा।

आतिशबाजी से जगमगाया आकाश

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की खुशी में रात 11 बजे भव्य आतिशबाजी की गई। रंग-बिरंगी आतिशबाजी से आकाश जगमगा उठा। हजारों श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की खुशी मनाई।

आधी रात शंखनाद और जयकारों के बीच हुआ श्रीकृष्ण जन्म

रात के 12 बजते ही मंदिर परिसर में वह पावन क्षण आया, जिसका श्रद्धालुओं को पूरे दिन इंतजार था। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही शंखनाद, घंटियों, बैंड-बाजे और जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।

श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्म की बधाई दी। इसके बाद नंदोत्सव धूमधाम से मनाया गया और भक्तों के बीच माखन-मिश्री का प्रसाद वितरित किया गया।

प्रशासन और विभिन्न संस्थाओं का मिला सहयोग

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की गई। महिला पुलिस, पुरुष पुलिस एवं यातायात पुलिस के जवानों ने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नगर पालिक निगम, कोरबा द्वारा स्वच्छता एवं आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग दिया गया। बिजली विभाग ने भी निर्बाध विद्युत व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

धर्म, संस्कृति और सामाजिक चेतना का बना संगम

इस वर्ष का श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा। इसमें सनातन संस्कृति, धार्मिक शिक्षा, बाल संस्कार, सामाजिक जागरूकता और सामाजिक समरसता का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

भव्य झांकियों ने जहां श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से परिचित कराया, वहीं बच्चों की प्रतियोगिताओं ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का संदेश दिया।

मोदी परिवार एवं कृष्णा ग्रुप के प्रयासों की सराहना

महोत्सव में पहुंचे जनप्रतिनिधियों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने मोदी परिवार एवं कृष्णा ग्रुप द्वारा वर्षों से धर्म एवं संस्कृति के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

श्रद्धालुओं ने कहा कि श्री सप्तदेव मंदिर का जन्माष्टमी महोत्सव अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि कोरबा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

श्री सप्तदेव मंदिर परिवार ट्रस्ट ने जताया आभार

महोत्सव की सफलता पर श्री सप्तदेव मंदिर परिवार ट्रस्ट ने सभी श्रद्धालुओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस एवं यातायात विभाग, नगर पालिक निगम, बिजली विभाग तथा विभिन्न समितियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

ट्रस्ट ने विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, श्री योग वेदांत सेवा समिति, पतंजलि योग पीठ समिति, छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल महिला संगठन, अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला समिति, छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन, अग्रवाल सभा कोरबा, हिंदू नारायणी सेना कोरबा एवं श्री सप्तदेव मंदिर महिला मंडल सहित सभी सहयोगी संस्थाओं एवं समितियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

ट्रस्ट ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा, श्रद्धालुओं की आस्था, समाज एवं विभिन्न संस्थाओं के सहयोग और प्रशासन के समन्वय से यह भव्य आयोजन सफल हो सका।

ट्रस्ट ने कहा कि श्रीकृष्ण भक्ति, सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की यह ज्योत निरंतर प्रज्वलित रहे तथा आने वाली पीढ़ियां भी अपनी गौरवशाली संस्कृति एवं संस्कारों से जुड़ी रहें—यही श्री सप्तदेव मंदिर परिवार ट्रस्ट के इस आयोजन का मूल उद्देश्य है।

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