LETEST
Blog

DMF की राशि से पौधे लगाने से पहले बने ठोस प्लान! मुकेश राठौर ने उठाए सवाल, कलेक्टर से अनियोजित वृक्षारोपण की जांच की मांग…

बिजली लाइनों के नीचे पौधारोपण से लेकर पार्किंग और ट्रैफिक तक पर जताई चिंता, बोले- पौधे लगाना ही नहीं, 3 से 5 साल तक उन्हें जिंदा रखना भी जरूरी

कोरबा छत्तीसगढ़ // कोरबा शहर में DMF (जिला खनिज न्यास) मद से कराए जा रहे वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण कार्यों को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश कुमार राठौर ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर वर्तमान में चल रहे कार्यों की समीक्षा, स्थल निरीक्षण और तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

मुकेश राठौर का कहना है कि वृक्षारोपण शहर की जरूरत है, लेकिन बिना समुचित योजना के केवल राशि खर्च करने के उद्देश्य से किया गया पौधारोपण जनता के हित में नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि DMF की राशि जनता की अमानत है और इसका इस्तेमाल ऐसे कार्यों में होना चाहिए, जिसका लंबे समय तक वास्तविक लाभ लोगों को मिले।

सड़क किनारे पौधारोपण से पहले ट्रैफिक और पार्किंग का हो अध्ययन

राठौर ने कोरबा के प्रमुख मार्गों की मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि शहर में पहले से ही भारी यातायात, सीमित पार्किंग और सड़क की उपयोगी चौड़ाई जैसी समस्याएं हैं। ऐसे में सड़क किनारे पौधे लगाने से पहले भविष्य की यातायात व्यवस्था, पार्किंग, पैदल आवागमन और सड़क चौड़ीकरण की संभावनाओं का तकनीकी अध्ययन होना जरूरी है।

उन्होंने आशंका जताई कि यदि इन पहलुओं को ध्यान में रखे बिना पौधारोपण किया गया तो आज का सौंदर्यीकरण भविष्य में ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

बिजली तारों के नीचे पौधे लगाने पर जनसुरक्षा का सवाल

मुकेश राठौर ने विद्युत लाइनों के नीचे अथवा उनके बेहद करीब किए जा रहे पौधारोपण को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि आज लगाए गए पौधे भले ही छोटे हों, लेकिन आने वाले वर्षों में जब वे बड़े होकर पेड़ बनेंगे तो उनकी शाखाएं विद्युत तारों के संपर्क में आ सकती हैं।

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि विद्युत विभाग की तकनीकी सलाह और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप स्थान तय किए बिना विद्युत लाइनों के आसपास पौधारोपण नहीं कराया जाए।

पौधे लगाना आसान, उन्हें बचाकर रखना बड़ी चुनौती

राठौर ने पौधारोपण की तकनीकी गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पौधों के लिए पर्याप्त आकार के गड्ढे, उपयुक्त मिट्टी, खाद, नियमित सिंचाई, ट्री-गार्ड और सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।

उन्होंने प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि पौधों की अगले तीन से पांच वर्षों तक देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी किस विभाग या एजेंसी की होगी।

उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होनी चाहिए कि कितने पौधे लगाए गए, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि उनमें से कितने पौधे जीवित रहकर वास्तव में पेड़ बने।

पहले पुराने DMF कार्यों का हिसाब, फिर नए काम

जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने पूर्व में DMF मद से कराए गए वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण कार्यों की भी समीक्षा की मांग की है। उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिर से नगर निगम कार्यालय तक किए गए वृक्षारोपण तथा अंधरी कछार स्कूल के पास लगाए गए फैंसी ग्रास की वर्तमान स्थिति का स्थलवार मूल्यांकन कराने की मांग की।

उनका कहना है कि यदि पुराने कार्य अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाए हैं तो पहले यह पता लगाया जाना चाहिए कि कहां कमी रही, रखरखाव किसकी जिम्मेदारी थी और खर्च के अनुपात में परिणाम क्यों नहीं मिला।

“DMF की राशि किसी विभाग की सामान्य खर्च राशि नहीं”

मुकेश राठौर ने कहा कि DMF की राशि किसी विभाग की सामान्य खर्च राशि नहीं, बल्कि जनता के हित के लिए उपलब्ध निधि है। इसलिए इसका उपयोग ऐसे कार्यों में होना चाहिए, जिनका स्थायी और वास्तविक लाभ आम लोगों को मिले।

उन्होंने कलेक्टर से मांग की कि वर्तमान वृक्षारोपण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का तत्काल स्थल निरीक्षण, यातायात एवं पार्किंग की व्यवहार्यता जांच, विद्युत सुरक्षा परीक्षण, पौधारोपण की तकनीकी गुणवत्ता की जांच तथा पूर्व के DMF कार्यों का “खर्च बनाम परिणाम” मूल्यांकन कराया जाए।

अनियोजित पौधारोपण के नहीं, बेहतर योजना के पक्ष में

मुकेश राठौर ने स्पष्ट किया कि वे वृक्षारोपण के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनका विरोध अनियोजित वृक्षारोपण और सार्वजनिक धन के संभावित दुरुपयोग को लेकर है।

उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से ऐसा काम होना चाहिए, जिसका परिणाम वर्षों तक दिखाई दे। सिर्फ पौधे लगाने का लक्ष्य पूरा करने के बजाय उनकी सुरक्षा, देखभाल और भविष्य की उपयोगिता को भी योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने प्रशासन से भविष्य में DMF मद से होने वाले वृक्षारोपण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों को समग्र योजना, तकनीकी सुरक्षा, यातायात व्यवहार्यता और दीर्घकालीन रखरखाव व्यवस्था सुनिश्चित होने के बाद ही स्वीकृति देने की मांग की है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page