
कोरबा छत्तीसगढ़ // क्या कोरबा में मेडिकल स्टोर संचालक अब भगवान बनने की भूल कर रहे हैं? या फिर चंद पैसों के लालच और अंधी लापरवाही में वे मरीजों को मौत के मुंह में धकेलने से भी परहेज नहीं कर रहे? शहर के निहारिका स्थित ‘गरिमा मेडिको’ की एक ऐसी खौफनाक और कातिलाना करतूत सामने आई है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।
एक महिला जो हाल ही में ओपन हार्ट सर्जरी जैसे गंभीर ऑपरेशन से गुजरी है, उसे डॉक्टर की पर्ची के उलट ऐसी गलत दवा थमा दी गई जिससे उसकी जान जाते-जाते बची! गरिमा मेडिको के संचालक जयंत अग्रवाल के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के बाद अब पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से लेकर ड्रग विभाग तक मोर्चा खोल दिया है।
Reclide’ की जगह थमा दिया ‘खतरनाक डोज’ — क्या मेडिकल संचालक खुद को डॉक्टर समझ रहा है?
पूरा मामला थाना सिविल लाइन रामपुर अंतर्गत निहारिका क्षेत्र का है। पीड़ित प्रमोद कुमार गुप्ता ने जो शिकायत दर्ज कराई है, वह गरिमा मेडिको के काले कारनामों को बेनकाब करती है:
मरीज की नाज़ुक हालत: प्रमोद गुप्ता की बहन सीमा अग्रवाल की बिलासपुर में ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी और वे कोरबा के प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉ. संजय पाण्डेय के इलाज पर निर्भर हैं।
डॉक्टर का पर्चा: 24 जून 2026 को डॉक्टर ने स्पष्ट रूप से Reclide XR-30, 60mg दवा लिखी थी।
गरिमा मेडिको की मनमानी: 14 जुलाई 2026 को ₹1,767 का बिल फाड़कर मरीज को Reclide के बजाय Reclimet XR-30, 60+500mg पकड़ा दी गई।
> लापरवाही की इंतहा देखिए: डॉक्टर ने मरीज के शरीर और हार्ट की स्थिति को देखकर सिर्फ एक सॉल्ट (Gliclazide) लिखा था। लेकिन गरिमा मेडिको ने अपनी मर्जी से उसमें 500mg का भारी-भरकम ‘Metformin’ सॉल्ट मिलाकर मरीज की ज़िंदगी को सीधे खतरे में डाल दिया!
‘शुगर क्रैश’ से बिगड़ी तबीयत, डॉक्टर भी रह गए हैरान!
गलत दवा का पहला डोज लेते ही मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी। उनकी ब्लड शुगर असामान्य रूप से इतनी तेज़ी से गिरी (Severe Hypoglycemia) कि वे मौत के मुहाने पर पहुंच गईं। आनन-फानन में जब परिजन मरीज को लेकर डॉक्टर के पास भागे और दवाइयां दिखाईं, तो डॉक्टर भी गरिमा मेडिको की इस करतूत को देखकर दंग रह गए! डॉक्टर ने साफ़ कहा कि पर्चे में यह दवा लिखी ही नहीं गई थी और यह गलत दवा ही इस जानलेवा स्थिति की वजह है।
गलती मानी नहीं, उल्टे दिखाई ऐंठ!
जब पीड़ित परिजन दवा की पर्ची और गलत गोलियां लेकर गरिमा मेडिको पहुंचे और संचालक जयंत अग्रवाल से जवाब मांगा, तो कोई अफ़सोस या माफ़ी मांगने के बजाय टालमटोल और बदतमीजी भरा रवैया अपनाया गया।
पीड़ित परिवार का आक्रोश फूट पड़ा है:
“हार्ट सर्जरी की मरीज को ऐसी हैवी दवा देना सीधा कत्ल करने की कोशिश जैसा है! अगर समय रहते डॉक्टर के पास न पहुंचते, तो मेरी बहन की जान चली जाती। गरिमा मेडिको जैसे मेडिकल स्टोर दुकान नहीं, बल्कि मौत के अड्डे बन चुके हैं!”
पुलिस और ड्रग इंस्पेक्टर के पाले में गेंद: क्या सील होगा गरिमा मेडिको?
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सिविल लाइन रामपुर में लिखित शिकायत देकर गरिमा मेडिको के संचालक जयंत अग्रवाल के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत की कॉपियां पुलिस अधीक्षक (SP) कोरबा और जिला औषधि निरीक्षक (Drug Inspector) को भी सौंप दी गई हैं।
सीधा सवाल — सिर्फ चालान या जेल?
यह महज एक ‘दवा देने में चूक’ का मामला नहीं है, यह मरीज की जिंदगी के साथ किया गया गंभीर खिलवाड़ और आपराधिक लापरवाही है। जब डॉक्टर का पर्चा और खरीदी गई दवा का बिल दोनों सबूत के तौर पर मौजूद हैं, तो फिर ढिलाई क्यों?
* क्या जिला औषधि निरीक्षक तुरंत ‘गरिमा मेडिको’ का लाइसेंस रद्द कर दुकान सील करेंगे?
* क्या कोरबा पुलिस मरीज की जान खतरे में डालने वाले संचालक जयंत अग्रवाल पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर उसे सलाखों के पीछे भेजेगी?
अगर ऐसे लापरवाह मेडिकल संचालकों पर तुरंत बुलडोज़र जैसी सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो कल किसी और परिवार का चिराग बुझ सकता है!





