
पत्रकारिता की आड़ में कथित वसूली और भ्रामक खबरों पर बिलासपुर प्रेस क्लब सख्त, शासन-प्रशासन को सौंपा ज्ञापन; डिजिटल पत्रकारिता के लिए 5 साल का अनुभव अनिवार्य करने की मांग

बिलासपुर। सोशल मीडिया पर पत्रकारिता के नाम पर कथित तौर पर भ्रामक और अपुष्ट खबरें प्रसारित करने तथा विज्ञापन के नाम पर अवैध वसूली की मिल रही शिकायतों को लेकर बिलासपुर प्रेस क्लब ने सख्त रुख अपनाया है। इस गंभीर विषय पर प्रेस क्लब ने राज्य शासन के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर बिलासपुर एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
प्रेस क्लब ने ज्ञापन के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यान डिजिटल मीडिया के नाम पर संचालित हो रही कथित अनियमित गतिविधियों की ओर आकर्षित किया है। ज्ञापन में कहा गया है कि बिलासपुर जिले में इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्वयं को पत्रकार बताने वाले कुछ व्यक्तियों द्वारा कथित रूप से अपुष्ट एवं भ्रामक वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं। इसके अलावा विज्ञापन देने और समाचार प्रकाशित करने के नाम पर अनुचित दबाव बनाने तथा अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
प्रेस क्लब का कहना है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था, आम जनता के विश्वास, डिजिटल सूचना की विश्वसनीयता और जिम्मेदार पत्रकारिता की छवि प्रभावित हो रही है। यदि ऐसी शिकायतों की समय रहते जांच नहीं होती, तो इसका नुकसान उन वास्तविक और जिम्मेदार पत्रकारों को भी उठाना पड़ सकता है, जो निष्पक्षता और जनहित को प्राथमिकता देकर पत्रकारिता कर रहे हैं।
विज्ञापन के नाम पर वसूली की शिकायतों की जांच की मांग
बिलासपुर प्रेस क्लब ने मांग की है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से समाचार प्रसारित करने वाले व्यक्तियों के संबंध में प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाए। सरकारी विज्ञापन जारी करने, स्वीकृति प्रदान करने और भुगतान की प्रक्रिया को स्पष्ट एवं पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
विज्ञापन के नाम पर कथित अवैध वसूली के मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सक्षम एजेंसियों से जांच कराई जाए। वहीं भ्रामक और अपुष्ट समाचार सामग्री प्रसारित करने के मामलों में लागू कानूनों के तहत निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
डिजिटल पत्रकारिता के लिए 5 वर्ष का अनुभव अनिवार्य करने का सुझाव
ज्ञापन में बिलासपुर प्रेस क्लब ने डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के नाम पर तेजी से बढ़ रही कथित अनियमित गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार से ठोस पहल करने की मांग भी उठाई है।
प्रेस क्लब ने सुझाव दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म या न्यूज पोर्टल के माध्यम से पत्रकारिता करने वाले व्यक्तियों के लिए न्यूनतम पांच वर्ष का पत्रकारिता अनुभव अनिवार्य किया जाना चाहिए। यह अनुभव प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अथवा किसी मान्यता प्राप्त समाचार संस्थान में कार्य करने का हो सकता है।
इसके साथ ही फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर किसी व्यक्ति को पत्रकारिता के क्षेत्र में लाभ दिलाने के मामलों की भी गहन जांच की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि कोई संस्था निजी लाभ या जान-पहचान के आधार पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करती है, तो संबंधित संस्था और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
वास्तविक पत्रकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा पर जोर
प्रेस क्लब ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई के नाम पर वास्तविक डिजिटल पत्रकारों, स्वतंत्र पत्रकारों, समाचार संस्थानों और आम नागरिकों के वैध अभिव्यक्ति के अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए। उद्देश्य किसी की स्वतंत्र पत्रकारिता पर अंकुश लगाना नहीं, बल्कि पत्रकारिता की आड़ में होने वाली कथित गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाना और जिम्मेदार पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखना है।
इसके लिए राज्य स्तर पर एक उपयुक्त शिकायत निवारण व्यवस्था विकसित करने तथा डिजिटल मीडिया से जुड़ी शिकायतों के त्वरित, पारदर्शी और निष्पक्ष निराकरण की व्यवस्था बनाने का सुझाव भी दिया गया है।
अब देखना होगा कि बिलासपुर प्रेस क्लब द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर शासन-प्रशासन क्या कदम उठाता है और डिजिटल पत्रकारिता के नाम पर सामने आ रही कथित अनियमितताओं की जांच के लिए किस तरह की व्यवस्था विकसित की जाती है।



