
कोयला लिंकेज से लेकर रिजेक्ट कोल और पावर प्लांट तक की CBI जांच की मांग, कलेक्टर के माध्यम से शासन को सौंपा ज्ञापन; प्रशासन पर शिकायतों की अनदेखी का आरोप

कोरबा, छत्तीसगढ़। ACB ग्रुप की कोलवाशरियों, रिजेक्ट कोल आधारित पावर प्लांटों, कोयला लिंकेज और पर्यावरणीय प्रदूषण से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने के विरोध में भारतीय जनाधिकार पार्टी छत्तीसगढ़ ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय कोरबा के सामने धरना-प्रदर्शन किया। पार्टी ने जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच, CBI जांच और संयुक्त विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की। वहीं पार्टी ने ऐलान किया है कि 3 नवंबर को रायपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित आगमन के दौरान काले झंडे दिखाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा।
कोयला लिंकेज से पावर प्लांट तक का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
धरने को संबोधित करते हुए पार्टी अध्यक्ष एवं संयोजक दीपक दुबे ने कहा कि ACB ग्रुप और उससे जुड़ी कोलवाशरियों एवं पावर प्लांटों को लेकर लंबे समय से केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों तथा नियामक संस्थाओं के समक्ष शिकायतें की जा रही हैं। इसके बावजूद शिकायतों पर ठोस और पारदर्शी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
उन्होंने मांग की कि कोयले की खदान से आपूर्ति, कोलवाशरी में प्रोसेसिंग, स्वच्छ कोयले, मिडलिंग्स, रिजेक्ट कोल, स्लरी, परिवहन और पावर प्लांट में वास्तविक खपत तक का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए। उनका सवाल था कि जिस वाशरी से रिजेक्ट कोल निकलता है और जिस पावर प्लांट में उसके उपयोग का दावा किया जाता है, दोनों के रिकॉर्ड का आमने-सामने मिलान कर वास्तविक स्थिति सामने क्यों नहीं लाई जा रही है?
3 नवंबर को अमित शाह के सामने काले झंडे दिखाने की घोषणा
पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि 23 सितंबर 2026 को SECL मुख्यालय बिलासपुर में आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान भी चेतावनी दी गई थी कि शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में छत्तीसगढ़ आने वाले केंद्रीय मंत्रियों एवं अधिकारियों के समक्ष विरोध दर्ज कराया जाएगा।
इसी घोषणा के तहत पार्टी ने 3 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के समापन समारोह के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित रायपुर आगमन के दौरान काले झंडे दिखाकर लोकतांत्रिक विरोध करने का ऐलान किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस माध्यम से ACB ग्रुप और SECL से संबंधित शिकायतों को केंद्र सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
6.50 लाख अवैध कोयला जब्ती और कोल लेवी का भी उठाया मुद्दा
धरने में वक्ताओं ने कथित तौर पर 6.50 लाख की अवैध कोयला जब्ती, संबंधित वाशरी एवं पावर प्लांट परिसर को सील किए जाने तथा कोल लेवी से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि पूर्व में 25 रुपये प्रति टन कोल लेवी वसूली के मामले में कलेक्टर, एसपी, खनिज अधिकारी और कई उद्योगपतियों के जेल जाने की कार्रवाई हुई थी, तो अब कथित तौर पर 100 रुपये प्रति टन की वसूली और इससे जुड़े लेन-देन की जांच क्यों नहीं हो रही है?
उन्होंने मांग की कि संबंधित वाशरी, लिंकेज और डीओ धारकों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए। ये सभी आरोप और सवाल पार्टी की ओर से उठाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच के जरिए वास्तविकता सामने लाने की मांग की गई है।
इन सात प्रमुख बिंदुओं पर जांच की मांग
युवा मोर्चा प्रदेश संयोजक संजय रत्नाकर, महामंत्री शैलेन्द्र गोपाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने जांच के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए।
1. ACB ग्रुप की सभी संबंधित कोलवाशरियों की स्वीकृत क्षमता और वास्तविक उत्पादन की जांच।
2. कोयला लिंकेज से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की मात्रा, गुणवत्ता और वास्तविक उपयोग का सत्यापन।
3. रिजेक्ट कोल एवं मिडलिंग्स की उत्पन्न मात्रा और पावर प्लांटों में वास्तविक खपत का मिलान।
4. पावर प्लांटों में ईंधन मिश्रण, कोयला खपत, बिजली उत्पादन और ग्रिड में बिजली आपूर्ति का ऑडिट।
5. स्टॉक, वेटब्रिज, परिवहन और डिस्पैच रिकॉर्ड का स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट।
6. जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, फ्लाई ऐश, ऐश डाइक, स्लरी और अपशिष्ट प्रबंधन की वैज्ञानिक जांच।
7. SECL से संबंधित कोयला परिवहन, टेंडर, भुगतान, स्टॉक और संविदा संबंधी शिकायतों की स्वतंत्र जांच।
संयुक्त तकनीकी टीम और CBI जांच की मांग
जिला संयोजक दिनेश यादव एवं जिलाध्यक्ष सूरजभान दास बैरागी ने कहा कि Coal Controller Organisation (CCO), SECL, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, खान एवं भूविज्ञान विभाग, जिला प्रशासन और अन्य तकनीकी संस्थाओं की संयुक्त टीम बनाकर वास्तविक भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए।
प्रदेश उपाध्यक्ष विन्देश सिंह राठौर एवं प्रदेश सचिव मुकेश भारतीय ने भी शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि केवल पत्राचार और शिकायतों को एक विभाग से दूसरे विभाग भेजने से जनहित के सवालों का समाधान नहीं होगा।
रिजेक्ट कोल की जगह लिंकेज का कोयला पावर प्लांट तक कैसे पहुंच रहा?
प्रवक्ता कृष्णा टंडन ने अपने संबोधन में MCCPL, रतिजा कोलवाशरी और बंधाखार स्थित 1×300 मेगावाट पावर प्लांट के रिकॉर्ड की स्थापना से लेकर वर्तमान तक स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि रिजेक्ट कोल आधारित पावर प्लांटों में रिजेक्ट कोल के बजाय लिंकेज से प्राप्त कोयला जाने और एक करोड़ टन से अधिक कोयले की आपूर्ति के दावों की वास्तविकता क्या है?
उन्होंने कोयले की प्राप्ति से लेकर अंतिम उपयोग तक संपूर्ण Material Balance Audit कराने, बिजली उत्पादन और ईंधन खपत का मिलान करने तथा संबंधित अभिलेखों का फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की। साथ ही SECL से संबंधित शिकायतों की स्वतंत्र जांच, CBI जांच और संयुक्त SIT गठन की मांग दोहराई।
कोरबा के संसाधनों पर पारदर्शिता जरूरी
युवा नेता एवं अनुसूचित जाति प्रदेश संयोजक हेमंत पैगवार ने कहा कि कोरबा देश के प्रमुख कोयला एवं ऊर्जा क्षेत्रों में शामिल है। यहां के कोयले, जल, भूमि और पर्यावरण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही जरूरी है। जनहित में उठाए गए सवालों का जवाब सरकारी रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच के माध्यम से मिलना चाहिए।
धरना-प्रदर्शन में प्रभु कश्यप, पुष्पेंद्र यादव, गंगा प्रसाद, संतोष कुमार, बजरंग रत्नाकर, शिव कुमार, छतराम यादव, सुनील कुमार, खिलेश्वर कश्यप, भीम यादव, संतोष यादव, अजय सूर्यवंशी, संतोष बेरेट, सूरज दास महंत, सुनील कंवर, प्रमोद मरकाम, तरुण कश्यप, किरण कंवर, सरोज सारथी, रजत पैगवार, सतीश कुमार, आशीष पैगवार, गीतेश कुमार और अनुराग पैगवार सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोयला लिंकेज, रिजेक्ट कोल, कोलवाशरी विस्तार और पावर प्लांटों से जुड़े आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कब शुरू होगी? पार्टी ने साफ कर दिया है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।



